एटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के मामले में निजी विद्यालय शिक्षा विभाग को गुमराह करते हैं। जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध नहीं कराते हैं। अब इन पर शिकंजा कसा जाएगा। उन्हें आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण कर हर साल इसके तहत पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा देना होगा। जिले में 1100 के करीब वित्तविहीन विद्यालय हैं। इनमें से महज 26 में ही आरटीई को लागू कराया जा सका है।
बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से वित्तविहीन स्कूलों का पूरा विवरण आरटीई पोर्टल पर मांगा गया है, जो 28 फरवरी तक देना होगा। परिषदीय विद्यालयों में अनिवार्य एवं बाल शिक्षा अधिकार को बढ़ावा देने के लिए यह प्रक्रिया की जा रही है। अब तक वित्तविहीन विद्यालय संचालक गुमराह करते रहते हैं। जिसकी वजह से गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का लाभ नहीं मिल पाता है।
बीएसए संजय सिंह ने बताया कि आरटीई के तहत कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए पोर्टल पर एनआईसी द्वारा नए मॉडयूल जोड़े गए हैं।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों को स्वयं ही पोर्टल पर जोड़े जाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों को अपनी आईडी और पासवर्ड भी जेनरेट करना होगा। जिन विद्यालयों का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, वह फीस प्रतिपूर्ति के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। बताया कि विद्यालयों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए यूजर मैन्युअल मुहैया कराया जा रहा है। वित्तविहीन विद्यालयों को त्रुटि रहित स्कूल का पूरा ब्योरा पोर्टल पर 28 फरवरी तक अलोड करना है। इसके बाद विद्यालय गलत सूचना उपलब्ध नहीं करा सकेंगे और निशुल्क बाल अनिवार्य शिक्षा को बढ़ावा मिल सकेगा।