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आरईएस को मिला अंतिम क्षणों में बजट

Wed, 11 Mar 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को लोहिया गांव में मार्ग पक्के करने व नालियां बनाने के लिए चालू वित्तीय वर्ष का प्रस्तावित बजट साल के अंत में मिल सका है। गनीमत है कि बजट पूरा मिला है। अन्यथा पिछले वित्तीय वर्ष के बजट की तरह चालू वित्तीय वर्ष का बजट भी अगले वित्तीय वर्ष में मिलता। सूत्रों की मानें तो पूरा बजट मिलने के बाद भी चुनौतियां अभी कम नहीं हैं। देरी से मिले बजट के चलते अब इसका काम अगले वित्तीय वर्ष तक चलेगा। इससे अगले वित्तीय वर्ष का बजट हासिल करने में विभाग के पसीने छूट जाएंगे। वैसे भी शासन द्वारा गलत मानकों के अनुरूप बजट स्वीकृति करने से अब तक अधिकांश लोहिया गांवों पूरी गलियां पक्की नहीं हो पाई हैं।
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वित्तीय वर्ष 2014-15 में चयनित 24 लोहिया गांवों के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने 540 लाख की धनराशि का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसमें 410 लाख रुपये पक्के मार्गों व 130 लाख रुपये पक्की नालियों के लिए था। शासन ने विभाग को दो किस्तों में यह धनराशि फरवरी में उपलब्ध करा दी है। इससे विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के लगभग एक दर्जन गांवों में कार्य शुरू भी करा दिया है।



बता दें कि शासन डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के तहत जिले में हर वर्ष में 24 लोहिया गांवों का चयन करता है। नाम न छापने की शर्त पर जानकारों की मानें तो चालू वर्ष का बजट देरी से मिलने से अब अगले वर्ष का बजट मिलने में और देरी हो सकती है। बजट का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो सरकार के अंतिम वित्तीय वर्ष में चयनित लोहिया गांवों का क्या हश्र होगा।
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इन गांवों में शुरू हुआ काम
-- शाहपुर मिलावली, जहांगीराबाद, मुहम्मद नगर बझेरा, दतौली, लालगढ़ी, रेजुआ, सोना, खेड़िया ताज, शहपुर बढौला।



अधिकांश गांवों में आज भी काम अधूरे
लोहिया गांवों में सीसी मार्ग कराने के लिए शासन गांव की जनसंख्या के आधार पर बजट स्वीकृति करता है। यह कतई व्यवहारिक सिद्ध नहीं हो पा रहा है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी गांव की आबादी दो हजार है, तो शासन से पक्के सीसी मार्ग के लिए उसे 20 लाख रुपये स्वीकृति किए जाएंगे। अब इन मानकों की व्यवहारिकता देखिए। यदि उस गांव में पांच से छह गलियां हैं और उनकी लंबाई-चौड़ाई के हिसाब से स्वीकृति बजट से सिर्फ तीन ही गलियां हो पा रही हैं। ऐसे में तीन गलियों का सीसी मार्ग से छूटना तय है। उदाहरण के तौर विकास खंड अलीगंज का गांव कुढ़ा में कई गलियां आज भी कच्ची हैं। वह गांव वर्ष 2012-13 का चयनित लोहिया गांव है।



चालू वित्तीय वर्ष का पूरा बजट विभाग को प्राप्त हो चुका है। इससे संबंधित गांवों में कार्य भी शुरू करा दिया गया है। विभाग की ओर से सभी लोहिया गांवों में बजट के अनुरूप ही कार्य संपन्न कराया जाता है।
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- आफताब आलम, अधिशासी अभियंता, आरईएस 
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