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नुमाइंदगी करने में पीछे रही आधी आबादी

Tue, 10 Jan 2017 11:32 PM IST
Amar Ujala
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यूपी इलेक्शन - फोटो : सोशल मीड‌िया
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 महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले राजनैतिक दल महिला दावेदारों के चयन में हमेशा से पिछडे़ रहे। जिले की नुमाइंदगी करने में आधी आबादी हमेशा से पीछे रही। जिले में 1952 से अब तक हुए विधानसभा चुनावों में केवल एक बार ही महिला विधायक ने अपना वर्चस्व कायम किया। पार्टियों ने भी कभी महिलाओं को टिकट देने में तरजीह नहीं दी। इसके चलते आधी आबादी को कभी मौका नहीं मिल सका, कि वो भी पुरुष प्रधान समाज में अपनी आवाज बुलंद कर पाती।
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जिले में वर्तमान में 560809 महिला मतदाता हैं, लेकिन विस चुनावों में महिलाओं की नुमाइंदगी करने वालों की संख्या शून्य है। विस चुनाव को लेकर बसपा और सपा ने अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं, लेकिन इनकी सूची में महिला प्रत्याशी नहीं है।

पिछले चुनावों की बात करें तो वर्ष 1996 मेें जलेसर सीट से मिथलेश कुमारी ने भाजपा की टिकट पर चुनाव जीता और विस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद कोई भी महिला विधायक नहीं चुनी जा सकी। वर्ष 2012 विस चुनाव में बसपा ने अलीगंज क्षेत्र से संघमित्रा मौर्य को प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे भी नंबर दो पर रह गईं। इसके साथ ही वर्ष 2007 में राजनैतिक दलों ने किसी महिला दावेदार को टिकट नहीं दी। लोकसभा चुनाव 2014 में महिलाओं को टिकट से दूर रखा गया। मौजूदा चुनाव के लिए भाजपा में तीन, कांग्रेस में चार महिला दावेदारों ने टिकट के लिए दावेदारी की है।
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जब्त होती रही जमानत
जिले में महिलाओं ने चुनाव में निर्दलीय दावेदारी की, लेकिन उनकी जमानत जब्त होती रही। मतदाताओं ने भी आधी आबादी को मत देने में खास तवज्जो नहीं दी। वर्ष 2012 में अलीगंज विस में चार महिलाओं ने नामांकन किया, जिसमें तीन ने चुनाव लड़ा और दो की जमानत जब्त हुई। एटा विस में दो महिलाओं ने दावेदारी की, जिसमें एक का नामांकन रद्द हो गया और एक ने नाम वापस ले लिया। मारहरा विस में तीन महिलाओं ने नामांकन किया और एक ने नाम वापस लिया, दो की जमानत यहां भी जब्त हो गई। जलेसर सीट पर भी तीन नामांकन में एक की जमानत जब्त हो गई।
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