मारहरा क्षेत्र के एक विद्यालय में बच्चों का परीक्षण करती आरबीएसके टीम ।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिले में 16 टीमों को लगाया गया है। इन टीमों ने गंभीर बीमारी से जूझ रहे 29 बच्चों का उपचार कराया है। जन्मजात बीमारियों के अलावा दिल में छेद वाले बच्चों को नया जीवन मिला है। टीमें आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूलों में जाकर 18 वर्ष तक के छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग करती हैं। नेत्र, त्वचा, किशोरावस्था की बीमारियों का प्राथमिक उपचार करती हैं। अगर कोई गंभीर बीमारी से ग्रसित होता है तो उसकी काउंसलिंग करके हायर सेंटरों के लिए रेफर कराया जाता है।
सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना काल में आरबीएसके टीम बच्चों की स्क्रीनिंग नहीं कर सकी थी। इसके बाद कोविड टीकाकरण में सहयोग करने लगी। नवंबर से टीमों को उनके मूल कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। 100 स्कूलों में टीमों ने 4209 और 38 आंगनबाड़ी केंद्रों के 1419 बच्चों की स्क्रीनिंग एक माह में की। इस दौरान स्कूलों में 300 और आंगनबाड़ी केंद्रों में 73 बच्चे बीमार मिले। इनमें से 53 बच्चों को उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। जबकि 29 गंभीर बीमार बच्चों को हायर सेंटर रेफर कराया गया। इनमें छह बच्चों के हाथ-पैर टेढ़े थे, दो बच्चों के दिलों में छेद, सात बच्चे कटे ओंठ व तालू वाले, न्यूरल ट्यूब (फोड़ा) व अन्य बीमारियों से ग्रसित थे। इन सभी का इलाज हो चुका है, जो अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।