एटा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने इमरजेंसी के पीछे स्थित कर्मचारियों के जर्जर आवासों को खाली कराने के लिए नोटिस जारी कर तीन दिन का समय दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज के परिसर में दो दिन पहले जर्जर डायलिसिस यूनिट की छत का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। इस हादसे में उपचार करा रहे एक मरीज और एक तीमारदार घायल हो गए। इसके बाद जर्जर आवासों को खाली कराने का निर्णय लिया गया है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि नोटिस में चेतावनी दी गई है कि तीन दिन में आवास खाली नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बताया कि मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा भी इससे पहले कई बार कर्मचारियों को इन जर्जर आवासों को खाली करने के लिए नोटिस जारी कर चुके हैं। इसके बावजूद कई कर्मचारी अब तक आवासों में रह रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने बताया कि जर्जर आवास समेत अन्य भवनों का लोक निर्माण विभाग आकलन करेगा। इसके बाद इन भवनों को ढहाया जाएगा।
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मरम्मत के नाम पर बंद किए गए छात्रावास
वर्जन आएगा
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- इस सत्र में नहीं मांगे गए आवेदन, पढ़ाई करने के लिए भटक रहे छात्र
संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों का भविष्य इस साल अंधकार में है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के महिला और पुरुष छात्रावासों में मरम्मत के चलते पूरे शैक्षिक सत्र के लिए एक भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। स्थिति यह है कि विभाग की ओर से इस बार छात्रावासों में प्रवेश के लिए आवेदन तक नहीं मांगे गए हैं। इससे दूरदराज के गांवों से पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित हैं। इनमें एक जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय के पीछे और दूसरा शांति नगर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज परिसर में है। हर वर्ष इन छात्रावासों में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है।
इस बार छात्रावासों में मरम्मत कार्य का हवाला देकर पूरे शैक्षिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया ही रोक दी गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि छात्रावास नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण शहर में रहने की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कुछ को रोजाना लंबी दूरी तय कर कॉलेज आना पड़ रहा है।
नहीं की कोई वैकल्पिक व्यवस्थाः
समाज कल्याण विभाग की ओर से विद्यार्थियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की गई जिससे विद्यार्थियों दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सके। वहीं सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि पूरे शैक्षिक सत्र तक छात्रावास बंद रखने थे तो जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। शिक्षा के अधिकार और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के सरकारी दावों के बीच छात्रावास बंद रहने से अनेक छात्रों का भविष्य अधर में नजर आ रहा है।
वर्जन
छात्रावास में वर्तमान में मरम्मत कार्य किया जा रहा है। इसकी वजह से विद्यार्थियों से इस शैक्षिक सत्र के लिए आवेदन नहीं मांगे गए हैं। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद अगले सत्र के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
- सत्यम त्रिपाठी, समाज कल्याण अधिकारी