स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वास्थ सेवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से करोड़ों की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाए लेकिन यहां अव्यवस्थाओं का आलम है। चिकित्सकों का टोटा होने के कारण ज्यादातर पीएचसी पर फार्मासिस्ट ही तैनात हैं लेकिन वे भी डयूटी से नदारद रहते हैं, जिसके चलते मरीजों और तीमारदारों को जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में मोटी फीस देकर इलाज कराना पड़ रहा है। वहीं सफाई व्यवस्था का हाल तो और बुरा है। रोजाना सफाई न होने के कारण पीएचसी परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल परिसर में घुसने में ही डर लगता है।
पीएचसी सरौंठ: पांच साल में भी नहीं पहुंचे चिकित्सक और फार्मासिस्ट
सरौंठ में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण पांच साल पहले कराया गया था लेकिन तब से लेकर अब तक यहां कभी चिकित्सक तो दूर फार्मासिस्ट भी नहीं पहुंचा। अस्पताल परिसर के हालात इस बात की चुगली खा रहे हैं कि अस्पताल परिसर महीनों खोला ही नहीं गया, जिसके चलते अस्पताल में बड़े बड़े झाड़ उग आए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस कारण मरीजों और तीमारदारों को जैथरा और जिला मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। आरोप है कि क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सक जैथरा के सरकारी अस्पताल में सांठगांठ कर इलाज के नाम पर लूट रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण निजी अस्पतालों में मोटी फीस देकर इलाज कराने को मजबूर हैं।
पीएसची राजा का रामपुर: कई वर्ष बाद भी चिकित्सक नहीं हुई तैनाती
राजा का रामपुर नगर पंचायत स्थित दुर्गा दास गोपी नाथ राजकीय चिकित्सालय में तो कई वर्र्षों से चिकित्सक तैनात नहीं है। चार महीने पहले अस्पताल में बदहाली की खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई तो अस्पताल परिसर में उगे झाड़ कटवा दिए गए, लेकिन चिकित्सक अभी तक तैनात नहीं हुआ है। इसके चलते करीब चालीस गावों अलीगंज, कासगंज, कायमगंज, कंपिल आदि के मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां अस्पताल का कोई फायदा नहीं है। यहां चिकित्सक तो दूर फार्मासिस्ट भी नहीं आता है। ऐसे में लोगों को सर्दी, जुकाम और बुखार तक की दवा नहीं मिलती।
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पीएचसी नरौरा: फिर बिगड़ने लगे हालात
अवागढ़ ब्लॉक क्षेत्र के नरौरा गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थय केंद्र शोपीस से कम नहीं है। यहां फार्मासिस्ट तैनात है लेकिन डयूटी पर नहीं आने के कारण अस्पताल के कमरों पर ग्रामीणों ने कब्जा कर लिया था। पिछले दिनों अस्पातल के बाहर नाले में सरकारी दवाइयां पड़ी मिलीं तो अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो फार्मासिस्ट भी ड्यूटी पर आने लगा और अस्पताल के कमरे भी खाली हो गए लेकिन धीरे-धीरे हालात फिर बिगड़ने लगे हैं। ग्रामीणों की माने तो डाक्टर के आने का वक्त नहीं है। मरीज आते हैं और घंटाें इंतजार करने के बार प्राइवेट चिकित्सक को मोटी फीस देकर इलाज कराने चले जाते हैं।
वर्जन
जिला अस्पताल समेत जिले भर में चिकित्सकों की कमी है। फार्मासिस्ट तैनात हैं। शासन को पत्र लिख कर चिकित्सकों की मांग की गई है। शासन से डॉक्टर नियुक्त होते ही सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सक तैनात कर बेहतर इलाज मुहैया कराया जाएगा।
डा. आरसी पांडेय
सीएमओ एटा
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सीएचसी अलीगंज: एक महीने से खराब पड़ी है एक्स-रे मशीन
अलीगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर कई वर्षों पहले एक्स-रे मशीन लगाई गई थी। वर्षों तक ताले में बंद करने के बाद तत्कालीन डीएम ने रूम का ताला खुलवाया तो मशीन जंग खा चुकी थी। डीएम की पहल पर मशीन सही कराई तो लोगों को राहत मिली, लेकिन एक माह पूर्व मशीन की पिक्चर ट्यूब खराब हो गई, तब से मरीजों को फीस देकर एक्स-रे कराना पड़ रहा है। सीएससी प्रभारी डा. राजेश शर्मा का कहना है कि ट्यूब कंपनी को भेजी गई। रिपेयर होकर आने पर सुविधा मिलेगी।