पानी की टंकी, जहां से आता है दूषित पानी
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ओवरहेड टैंकों की सफाई नहीं किए जाने से लोग पानी के नाम पर बीमारी पीने को मजबूर हैं। लोगों के घरों में प्रदूषित पानी सप्लाई हो रहा है। वहीं पानी में फ्लोराइड, लेड अधिकता भी लोगों को अपंगता की जद में ला रही है। हालांकि पालिका प्रशासन का दावा है कि हर तीन माह में टैंकों की सफाई कराई जाती है। पर, पानी में बढ़ता प्रदूषण दावे की हकीकत को बयां कर रहा है।
जिले में पेयजल संकट के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता भी बिगड़ रही है। जल में लेड और फ्लोराइड की अधिकता है। इससे लोग हड्डियोें के टेढ़ेपन की बीमारी फ्लोरोसिस फैलने का खतरा बढ़ गया है। वहीं ओवरहैड टैंकों की सफाई समय से नहीं होने से भी पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। बता दें कि शहर में पालिका द्वारा संचालित 10 ओवरहैड टैंकों में से छह से पानी की सप्लाई हो रही है। चार पूरी तरह से बंद हैं। पालिका के जलकल प्रभारी सोवरन सिंह यादव कहते हैं कि हर तीन महीने में टैंकों की सफाई कराती जाती है। साथ ही टैंकों में क्लोरीन भी डाला जाता है। बताया कि पालिका के ट्यूबवेल का पानी 300 फीट नीचे से आता है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता बेहतर है। कहीं-कहीं पाइप लाइन टूटने से भले ही पानी प्रदूषित हो रहा है। उसकी भी जांच कराकर ठीक कराया जाता है। डॉ राजेश सक्सेना कहते हैं कि पानी में आयरन की अधिकता होने पर पथरी होने की संभावना होती है। फ्लोराइड की अधिकता शरीर में कैल्शियम की मात्रा को कम करता है। पानी में टीडीएस, आयरन और फ्लोराइड की बढ़ती मात्रा नुकसानदेहहै।
ये हैं पानी में तत्व
तत्व मानक उपलब्धता
नाइट्रेट- 50 एमजी 45 एमजी
फ्लोराइड- 2.5 एमजी 1.5 एमजी
क्लोराइड- 800 एमजी 300 एमजी
पीएच वैल्यू- 8.0 7.7
टीडीएस- 700एमजी 1500 एमजी
हार्डनेस- 800 एमजी 500 एमजी
आयरन- 0.5एमजी 1.0 एमजी
ऐसे बढ़ते हैं रासायनिक तत्व
शहर सहित जिलेभर में जगह-जगह कचरे के ढेर से रासायनिक तत्व पानी में घुलकर जमीन में रिसते हैं। यही पानी ट्यूबवेल, कुएं, अन्य जलस्रोतों तक पहुंच रहा है। जल परीक्षण प्रयोगशाला के टेक्नीशियन हरेंद्र ने कहा पानी में फ्लोराइड और आयरन (लेड) की अधिकता से जल दूषित की श्रेणी में है।