पटना पक्षी विहार अधिकारियों और प्रशासन की अनदेखी के चलते उजड़ने के कगार पर पहुंचता जा रहा है। पक्षियों के आने में मात्र पखवाड़े की देरी है, लेकिन पक्षी विहार की झील में नाम मात्र का ही पानी उपलब्ध है। साफ सफाई की व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। साथ में खराब सड़क और परिवहन की व्यवस्था न होने से पर्यटकों की संख्या भी नहीं बढ़ पा रही है।
तीन सालों से जर्जर और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण जहां परिवहन व्यवस्था के नाम पर प्राइवेट बस ही उपलब्ध हैं। प्राइवेट बस सेवा में होने वाली असुविधा के कारण पर्यटक एक बार आने के बाद दोबारा नहीं आ पाता है। प्रवासी पक्षियों के आगमन में अब मात्र 10-15 दिनों की देरी है, लेकिन पक्षी विहार प्रशासन ने कोई तैयारी नहीं की। गंदगी की भरमार के साथ साथ विशाल झील में नाम मात्र का पानी है।
झील में मात्र एक फुट पानी
झील बरसात में पानी से लबालब भर जाती थी। पानी की उपयुक्त मात्रा होने के चलते प्रवासी-अप्रवासी लाखों पक्षी पहुंचते थे लेकिन पहुंच अब झील में मात्र एक फुट पानी है। यदि समय रहते झील में पानी की व्यवस्था न हुई तो पक्षी कैसे रुक पाएंगे।
मात्र दो गार्ड के सहारे सुरक्षा
सवा सौ एकड़ में फैले पक्षी विहार की सुरक्षा मात्र दो फॉरेस्ट गार्ड के सहारे है। वह भी पूरे दिन टिकट बेचने में लगे रहते हैं। वहीं सफाई व्यवस्था के लिए कोई कर्मचारी व बगीचों की देखभाल के लिए कोई भी माली तैनात नहीं है।
पविकास के लिए धन नहीं मिल पाया है। झील में पानी के लिए डीएम और सिंचाई विभाग फीरोजाबाद से वार्ता चल रही है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है।
वन क्षेत्राधिकारी, बिहारीलाल