एटा-कासगंज नई रेल लाइन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर आपत्तियां दर्ज कराने की 15 दिन की समय सीमा पूरी हो चुकी है। इस दौरान 30 से अधिक किसानों ने बढ़े हुए मुआवजे की मांग उठाई है और आपत्तियों के निस्तारण के बाद जल्द ही रेल लाइन के निर्माण कार्य का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
एटा-कासगंज नई रेल लाइन परियोजना का वर्षों पुराना सपना अब हकीकत बनने की ओर एक कदम और बढ़ गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए अधिग्रहीत भूमि पर जारी 20-एफ गजट के बाद आपत्तियां दर्ज कराने की 15 दिन की समय सीमा पूरी हो गई है। निर्धारित अवधि में 30 से अधिक किसानों और भूस्वामियों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
अधिकांश किसानों ने कहा कि उनकी जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य और सर्किल रेट पहले की तुलना में अधिक है। ऐसे में उन्हें मौजूदा दरों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। जिला प्रशासन का कहना है कि सभी आपत्तियों की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमानुसार फैसला लिया जाएगा। मुआवजा तय होने के बाद उसका वितरण किया जाएगा और अधिग्रहीत भूमि रेलवे के सुपुर्द कर दी जाएगी।
भूमि मिलने के साथ ही पूर्वोत्तर रेलवे और कार्यदायी संस्था परियोजना को धरातल पर उतारने का काम शुरू करेगी। पहले चरण में मिट्टी पड़ने के साथ ही भूमि का समतलीकरण होगा। इसके बाद पुल-पुलियों का निर्माण और रेल पटरी बिछाने का कार्य किया जाएगा। परियोजना का प्रारंभिक सर्वे पहले ही पूरा हो चुका है।
एटा और कासगंज के लिए महत्वपूर्ण है परियोजना
एटा-कासगंज रेल लाइन विस्तार जिले की सबसे महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में से एक है। रेल संपर्क स्थापित होने से यात्रियों को सस्ता और सुविधाजनक सफर मिलेगा। इसके साथ ही व्यापार, कृषि, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब लोगों को मुआवजा वितरण और निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है।