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पर्यावरण का मुद्दा पीछे छूटा, गूंजी मुआवजे की मांग

Wed, 11 May 2016 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
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क्रिटिकल जवाहर तापीय परियोजना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सकीट क्षेत्र में प्रस्तावित 1320 मेगावाट सुपर क्रिटिकल जवाहर तापीय परियोजना के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर बुधवार को लोक सुनवाई हुई। मामला पर्यावरण से जुड़ा था लेकिन लोक  सुनवाई में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे और अन्य समस्याओं पर चर्चा होती रही। किसानों ने सुनवाई में मौजूद अपर जिलाधिकारी को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा।  
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गांव मलावन के पास स्थित सकीट ब्लाक मुख्यालय पर बुधवार को यह लोक सुनवाई हुई। इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ आरएस सिंह, मुख्य अभियंता विद्युत उत्पादन आरके जैन, हरदुआगंज थर्मल पावर कारपोरेशन के जीएम आरके वाही, एडीएम महेश चंद्र, एसडीएम सुनील कुमार वर्मा और परियोजना के अधीक्षण अभियंता एनएन त्रिपाठी शामिल हुए। करीब दो घंटे तक चली लोक सुनवाई में किसी भी किसान ने पर्यावरण संबंधी कोई सवाल नहीं पूछा। वे रास्तों, बढ़ी दरों से मुआवजा देने, मुआवजा ले चुके किसानों के भूमि को बैंक में गिरवी रख ऋण लेने जैसे मुद्दे उठाते रहे तो अधिकारी तापीय परियोजना में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होने की बात कहते रहे। लोक सुनवाई में समस्याओं का अंबार लगा तो अधीक्षण अभियंता को घोषणा करनी पड़ी कि इस संबंध में तीस जून को किसानों के साथ बैठक की जाएगी। एडीएम महेश चंद्र ने ने भी कहा कि इन समस्याओं के लिए किसान उनसे उनके कार्यालय में आकर मिले। इसमें राम निवास सिंह चौहान, रामपाल सिंह प्रधान, राम अवतार सिंह, अनिल राठौर समेत अनेक किसान लोक सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। 

निगोेह हसनपुर निवासी रामपाल सिंह ने बताया कि परियोजना के लिए निगोह हसनपुर, बबरौती, मलावन, अयार आदि गांवों की कृषि भूमि अधिग्रहण की गई है। अधिग्रहण के वक्त अधिक रेट पर मुआवजा, किसानों के परिवार को रोजगार, अधिग्रहण नियमावली में संशोधन के हिसाब से मुआवजा देने, जिले को 24 घंटे बिजली देने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिग्रहण के वक्त जिला प्रशासन ने किसानों के साथ धोखा किया। पूरे जिले की भूमि के सर्किल रेट बढ़ाए, लेकिन चार गावों को छोड़ दिया। आज लोक सुनवाई से पहले भी किसानों से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए हैं।
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2010 में भूमि का अधिग्रहण होने और मुआवजा वितरित होने के बाद भी तहसील प्रशासन ने भूमि की खतौनी में इसे दर्ज नहीं किया। इसी का फायदा उठा कर करीब पचास किसानों ने भूमि को गिरवी रख कर बैंकों से करोड़ाें रुपये लोन ले रखा है। इसकी वजह से किसानों, बैंक, परियोजना, राजस्व विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। जवाहर तापीय परियोजना के एसई का कहना है कि ये कानूनी पहलू है। कानूनी विशेषज्ञों से राय लेकर कोई कदम उठाया जाएगा।

लोक सुनवाई में पूर्व सांसद कैलाश यादव ने बताया कि यदि सकीट में जवाहर तापीय परियोजना, अल्ट्रा मेगा थर्मल पावर प्लांट और सौर ऊर्जा पार्क को हरी झंडी मिली तो मलावन में मिनी एयरपोर्ट बनना तय हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मलावन क्षेत्र में हवाई अड्डा के लिए कार्रवाई शुुरू कर दी है। इंतजार है सिर्फ  जुलाई का है, जब सीएम जवाहर परियोजना का शिलान्यास करेंगे।

वर्ष 2010 में जवाहर तापीय परियोजना के लिए चार गांवों के किसानों की 350 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हुआ था।  336 हेक्टेयर भूमि का मुआवजा दिया जा चुका है। इनमें नौ किसान ऐसे हैं जो कहीं बाहर रहते हैं और खोजने के बाद नहीं मिले। वे मुआवजे के चेक लेने भी नहीं आए। ये किसान मोबाइल नंबर 9458096530 पर मुझसे संपर्क कर मुआवजे का चेक उठा सकते हैं।  1458 परिवारों की जमीन अधिग्रहीत हुई है, इनमें से 118 परिवारों से भूमि का करार नहीं हो पाया है। इनसे करार करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। किसान नए भूमि अधिग्रहण बिल के हिसाब से मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन वो संभव नहीं है।
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 एनएन त्रिपाठी, अधीक्षण अभियंता जवाहर तापीय परियोजना

 परियोजना से होने वाले फायदे
परियोजना के आसपास भूमि की कीमत बढ़ेगी 
बेरोजगार युवाओं को रोजगार लिए दरवाजे खुलेंगे
मलावन क्षेत्र का विकास होगा, नया बाजार बनेगा
निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को मिलेगा काम
बाहर से लोग आएंगे तो आवासीय कालोनियां बनेंगी
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