प्रशासन की कुंभकर्णी नींद अगर पहले ही टूट जाती 40 की मौत न होती। तो कई मां की गोद न सूनी होती, बच्चे अनाथ न होते, महिलाओं के माथे का सिंदूर न उजड़ता। अब कार्रवाई हो रही है तो खुलासा हो रहा है कि किस तरह से शराब का यह अवैध धंधा इलाके में फैला हुआ है। दो दिन में चालीस स्थानों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान जमीनों में दबे कच्ची शराब के ड्रम निकल रहे हैं। गांव-गांव जहर बनाने की भट्टियां चल रही थी।
सोमवार और मंगलवार को नया गांव, जसरथपुर, मारहरा, लालपुर, ठपुूआ, लैहचोरा, फरसौली, जरानीकलां, लोहरी, फाजिलपुर, सिमराह, रिजोर, गढ़िया जान, मलगांव, उदेतपुर समेत करीब 40 स्थान पर कार्रवाई हुई। टपुआ, चिरौरी और नया गांव में तो पुलिस ने जमीन के अंदर दबा कर रखे गए शराब से भरे ड्रम खोद निकाले। ग्रामीणों की मानें तो पुलिस और आबकारी अफसरों को कच्ची शराब के धंघे की जानकारी थी लेकिन सबने चंद रुपयों के लिए अपनी आंखें बंद की हुई थी। पुलिस ने अभी तक किसी बड़े शराब माफिया को गिरफ्तार नहीं सकी है। केवल दस-पांच लीटर शराब बेचने वालों को पकड़ कर अपनी पीठ थपथपा रही है।