एटा। लकड़ी को बचाने के उद्देश्य से शासन ने अंत्येष्टि स्थलों में गोकाष्ठ का प्रयोग करने का आदेश दिया। साल भर बीत गई, लेकिन जिले में कहीं भी यह व्यवस्था नहीं की गई। अब तो जिम्मेदार इस आदेश को भूल भी गए हैं। गोशालाओं में काफी मात्रा में गोबर एकत्रित होता है।
इसके निस्तारण के साथ ही आय का स्रोत बनाने के लिए गोकाष्ठ उत्पादन की रूपरेखा बनाई गई। यह जलाने के कार्य में लकड़ी के समान ही प्रयोग में आता है। गाय के गोबर को पवित्र माना जाता है और शवों के अंतिम संस्कार में उपलों का प्रयोग भी होता है। इसे देखते हुए सरकार ने आदेश जारी किया कि गोशालाओं से गोकाष्ठ लेकर अंत्येष्टि स्थलों को उपलब्ध कराया जाए। जिसका इस्तेमाल शवों के दाह संस्कार में किया जाए। फरवरी 2023 में यह आदेश शासन के विशेष सचिव ने सभी नगर आयुक्त, नगर पालिका व नगर पंचायतों के ईओ के लिए जारी किया था।
कहा गया था कि नगरीय निकायों में अंत्येष्टि स्थलों पर दाह संस्कार के लिए लकड़ी के स्थान पर गोष्ठी का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गोशालाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा सके। बिना विलंब इस पर कार्रवाई करने के लिए गया। लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी इस पर कुछ भी नहीं हो सका। सीवीओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि पांच गोशालाओं में सुविधा उपलब्ध है। लेकिन गोष्ठ की मांग नहीं है। कई बार पत्राचार भी किया गया, फिर भी कुछ नहीं हुआ। एडीएम प्रशासन सत्य प्रकाश ने बताया कि शासनादेश का पालन कराने के लिए सभी ईओ को निर्देशित किया जाएगा।