एटा। 2020 में हुई फौजदारी की घटना के दो मुकदमे दर्ज हो गए। पहले घटना के तुरंत बाद थाने में रिपोर्ट लिखी गई। बाद में जालसाजी कर पुरानी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत में मुकदमा दायर करा लिया गया। अदालत को गुमराह कर फर्जीवाड़ा करने वाली दो महिलाओं सहित तीन लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया गया है।
मामला अवागढ़ थाना क्षेत्र के गांव नगला धारू से जुड़ा हुआ है। यहां के रहने वाले सुनील कुमार उर्फ सोनू दुबे ने सिविल जज (जूडि) जलेसर की अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। बताया कि 17 सितंबर 2020 की घटना बताकर हरेंद्र सिंह ने अवागढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें सुनील के अलावा गांव के ही केशव दुबे ओर राजेंद्र को नामजद किया गया। यह मामला पुलिस की चार्जशीट के बाद न्यायालय में विचाराधीन है। घटना में रजनी दुबे और रेशमा को घायल बताया गया था। बाद में रजनी देवी ने सिविल जज (जूडि) जलेसर की अदालत में प्रार्थनापत्र दिया। 17 सितंबर 2020 की ही घटना बताकर इसमें सुनील सहित उनके पिता तिलक सिंह, राजेंद्र, केशव, रमेश, राजा, अभिषेक को नामजद किया गया।
सुनील के अधिवक्ता प्रशांत पुंढीर ने बताया कि विपक्षियों ने पुराने मुकदमे की छायाप्रतियां धोखाधाड़ी से प्राप्त कीं और इसे प्रार्थनापत्र में लगा दिया। इस तरह अदालत को गुमराह किया गया। 22 जुलाई 2022 को अदालत ने परिवाद दायर कर सुनवाई शुरू कर दी। अब सुनील के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई हुई तो यह पूरा फर्जीवाड़ा अदालत में सामने आया। जिस पर अदालत ने रजनी, रेशमा और हरेंद्र सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश अवागढ़ थाना प्रभारी को दिया है।