मारहरा। मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए पिवारी में जमीन अधिग्रहीत की गई है। सोमवार को अधिकारी बुलडोजर लेकर मकान तोड़ कब्जा लेने गए। स्थानीय लोगों ने बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई का आरोप लगाते हुए विरोध कर दिया। इस पर अधिकारियों को लौटना पड़ा।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी, सीओ सदर संजय कुमार सिंह और नायब तहसीलदार सुशील कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे। बुलडोजर की मदद से मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। तभी विरोध शुरू हो गया। प्रभावित परिवारों का कहना था कि मुआवजे का निर्धारण गलत तरीके से किया गया है। मकानों का मुआवजा कृषि भूमि की दर से दिया जा रहा है, जबकि यह जमीन आबादी क्षेत्र में आती है। हम लोगों के परिवार दादा-परदादा के समय से यहां रह रहे हैं।
नीटू ने बताया कि कुछ वर्ष पहले ही उन्होंने 20 लाख रुपये की लागत से तीन मंजिला मकान बनाया था। इसके एवज में उन्हें केवल पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय लेखपाल ने मुआवजा वितरण में पक्षपात किया है। कम जगह वाले कुछ लोगों को अधिक मुआवजा दिया गया, जबकि बड़ी जमीन और मकान वालों को बेहद कम राशि देकर हटाने का प्रयास हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना था कि सरकार ने मुआवजा तय करने में बाजार मूल्य की अनदेखी की है और उन्हें चौथाई दर पर राशि दी जा रही है। सीएम पोर्टल पर इसकी शिकायत भी दर्ज कराई है। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मकानों का हटना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए पारदर्शी और न्यायपूर्ण मुआवजा दिया जाना चाहिए।
रमेश कुमार, राजेश सक्सेना, धीरेंद्र माहेश्वरी, अशोक कुमार, जयप्रकाश, गीता देवी, मीरा देवी आदि लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मुआवजा आबादी क्षेत्र के हिसाब से दिया जाए और कार्रवाई से पहले पर्याप्त समय और नोटिस दिया जाए।
सभी ने मुआवजा प्राप्त कर लिया है। उन्हें कब्जा छोड़ देना चाहिए था, लेकिन कुछ लोगों ने कब्जा नहीं छोड़ा है। इसके लिए उन्हें 3 दिन का नोटिस दिया गया है। - सत्य प्रकाश, एडीएम प्रशासन