नोटबंदी के बीस दिन बाद भी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। जिले के हजारों युवा दिल्ली में काम करने जाते हैं, लेकिन नोटबंदी से पैदा हुए हालात के कारण काम नहीं मिल रहा है। इससे कामगार और मजदूर लौट रहे हैं। भट्ठों में काम करे मजदूर भी कामकाज समेट कर घर लौटने लगे हैं। वहीं दिल्ली से आने वाली बसों में बरोजगार युवाओं की भीड़ तेजी से अपने घर लौट रही है।
जैथरा निवासी राजू फरीदाबाद स्थित एक फैक्ट्री में एक्टिवा के कलपुर्जे बनाने का काम करता है। नोटबंदी के बाद कलपुर्जों की आपूर्ति बंद होने से फैक्ट्री मालिक ने उसे काम छोड़ने के लिए कह दिया। इसके चलते राजू काम छोड़ कर घर लौट आया। निधौली निवासी घनश्याम सलीमपुर दिल्ली स्थित एक बेकरी में काम करता था। जैसे तैसे मालिक ने 15 दिनों तक काम पर रखा, लेकिन रविवार को उसके मालिक ने पुराने नोट देकर भुगतान करने के बाद काम पर आने से मना कर दिया। किदवई नगर निवासी राम किशोर एक्सपोर्ट कंपनी में सिलाई काम करता था, लेकिन कंपनी को रॉ मैटेरियल नहीं मिलने के कारण मालिक ने ऑडर कैंसिल कर काम बीच में रोक दिया। राम किशोर की मानें तो कंपनी बड़े भुगतान तो चेक से कर रही है, लेकिन सुई, धागा, कतरन, बटन जैसा रॉ मैटेरियल खरीदने के लिए कंपनी के पास रुपये नहीं हैं। पीपल अड्डा निवासी प्रमोद दिल्ली में तीन स्थानों पर पार्ट टाइम अकाउंटेंट का काम कर परिवार चला रहा था, लेकिन उसकी कंपनी को काम नहीं मिलने के कारण मालिक ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। प्रमोद और राजू की मानें तो दिल्ली से बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार काम नहीं मिलने के कारण घर लौट रहे हैं। कमोवेश यही हाल भट्ठा मजदूरों का है। मजदूरों ने भुगतान नहीं मिलने से पलायन शुरू कर दिया है। इसके चलते भट्ठा स्वामी परेशान हैं।