जिस बुनियादी शिक्षा पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, जनपद में उसकी ही स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। एटा और कासगंज करीब 3000 परिषदीय स्कूल में जहां 25 फीसदी के भवन जर्जर पड़े हैं। खिड़की, दरवाजे टूटे हुए हैं। कई भवन तो गिरासू हालत में हैं। वहीं कासगंज के प्राथमिक स्कूल नाथूपुर जैसे सैकड़ों स्कूल तो ऐसे हैं, जहां नौनिहालों को बैठने के लिए टाट-पट्टी भी नसीब नहीं है। उन्हें अपने घर से चटाई अथवा बोरी लानी पड़ती है। इसके अलावा स्कूलों में पेयजल, शौचालय आदि की भी बदइंतजामी बनी हुई है। जहां टॉयलेट बने भी हैं, वे इतने बदहाल हैं, कि उनका इस्तेमाल कर पाना संभव नहीं है।
तस्वीर-एक
प्राथमिक पाठशाला, यूनिवर्सल नंबर एक
समय- सुबह 9.10 बजे
दो कमरों वाले विद्यालय में एक अध्यापिका और महज दो बच्चे थे। कमरों में अंधेरा होने के चलते बच्चे बाहर बरामदे में बैठे थे। जबकि विद्यालय में छात्र संख्या 60 है। शिक्षिका ने बताया कि स्कूल में पांच तक कक्षाएं चलती हैं, लेकिन कक्ष दो ही हैं। बिजली कनेक्शन के सवाल पर वे चुप्पी साध गईं।
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तस्वीर-दो
प्राथमिक पाठशाला, यूनिवर्सल नंबर तीन
समय- सुबह 9.15 बजे
विद्यालय में सिर्फ पांच-छह बच्चे आए थे, वे भी अध्यापक के साथ कागज जलाकर ताप रहे थे। इस स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए छोटी-छोटी बेंच रखी दिखी। स्कूल में संसाधनों के नाम पर एक नल है, जिससे पूरा बाजार पानी भरता है।
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तस्वीर-तीन
प्राथमिक विद्यालय, कैलाशगंज
समय- सुबह 9.25 बजे
एक बरामदे के ऊपर टिन शेट डालकर यहां प्राथमिक विद्यालय बनाया गया है। बेंच नहीं होने से बच्चे जमीन पर टाट और चटाई बिछाकर बैठते हैं। बरामदे के बाहर मैदान में गंदा पानी भरा हुआ है। सहायक अध्यापिका ने बताया कि विद्यालय में बिजली नहीं है।
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तस्वीर-चार
प्राथमिक पाठशाला, तकिया होली गेट
समय- सुबह 9.45 बजे
स्कूल के नाम पर जर्जर बरामदा और गिरासू भवन ही है। यहां भी बच्चे जमीन पर टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ते हैं। स्कूल में मिड डे मील के लिए अब तक बर्तनों का वितरण नहीं हो सका है।
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तस्वीर-पांच
प्राथमिक विद्यालय, पटियाली गेट
समय- सुबह 10.00 बजे
नया भवन, तीन कमरे और पर्याप्त स्टाफ, लेकिन व्यवस्थाएं नाकाफी। मिड डे मील के बर्तन तो हैं, लेकिन बैठने के लिए टाट-पट्टी का ही सहारा। बच्चे सुबह बस्ता रखने के बाद सबसे पहले बैठने के लिए टाट-पट्टी बिछाते हैं। शिक्षक ने बताया कि बच्चों को बैठाने के लिए विभाग ने यही टाट-पट्टी ही मुहैया कराई है।
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एक भवन, तीन कमरे, तीन स्कूल
सुबह 10.15 बजे प्राथमिक पाठशाला शहीद पार्क
एक जर्जर भवन के तीन कमरों में तीन स्कूल चल रहे थे। एक कक्ष में रामकृष्ण प्राथमिक विद्यालय संचालित था, जिसमें महज पांच बच्चे बैठे थे। दूसरे कक्ष में शहीद सुभाष चंद्र बोस प्राथमिक विद्यालय के कक्ष में 8 बच्चे और तीसरे कक्ष में लक्ष्मीबाई प्राथमिक विद्यालय में सात बच्चे थे। कक्षों में पीछे की ओर कूड़ा भरा पड़ा था। शिक्षक ने बताया कि विद्यालय में मीटर लगा है, लेकिन पिछले दिनों कनेक्शन काट दिया गया।
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इनका कहना है
विद्यालयों में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए जितना बजट आता है, उतना स्कूलों को दिया जा रहा है। शासन से सुविधाएं मिलने के बाद व्यवस्थाएं सुधरेंगी।
एसएस यादव, बीएसए, एटा