एटा। करीब तीन साल पहले एक युवक लापता हुआ। भाई ने शक के आधार पर उसकी पत्नी व दो सालों पर अदालत के माध्यम से प्राथमिकी दर्ज करा दी। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश सुधा ने इनको बरी कर दिया गया। युवक का अब तक पता नहीं लग सका है।
मामले की प्राथमिकी थाना सकरौली में गांव जलूखेड़ा निवासी रामचंद्र ने दर्ज कराई थी। इसका आरोप था कि 27 फरवरी 2014 से उसका छोटा भाई छोटेलाल लापता है। तलाश और पूछताछ के दौरान पता लगा कि छोटेलाल को आखिरी बार उसकी पत्नी गुड्डी देवी व साले महेश और हरिश्चंद्र निवासी गांव बाबसा थाना कोतवाली देहात के साथ देखा था।
पैरवी करने पर इन इन लोगों ने दबाव बनाया और जान से मारने की धमकी दी। उसको आशंका है कि संपत्ति एवं बीमा की धनराशि हड़पने के लिए छोटेलाल की हत्या कर इन लोगों ने शव गायब कर दिया है या कहीं बंधक बनाकर रखा है।
अदालत के आदेश पर दर्ज अपहरण की प्राथमिकी में पुलिस ने विचेना कर तीनों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिए। यहां रामचंद्र सहित उसके परिजन व पुलिसकर्मियों तथा गांव के कुछ लोगों की गवाही की गई लेकिन किसी की गवाही से यह बात साबित नहीं हुई कि आरोपियों ने छोटेलाल का अपहरण किया है। अधिकांश लोग पुलिस विवेचना में दर्ज कराए गए बयानों से ही मुकर गए।