पहले मौसम की मार और मुआवजे ने किसानों को ‘घायल’ किया अब बाजार के भाव ने
उनकी पीड़ा को बढ़ा दिया है। मौसम से हुई फसल बर्बादी के बाद अब किसान के
पास जो भी गेहूें बचा है उसे बाजार में भाव नहीं मिल रहा। हालात इतने खराब
हैं कि मंडी में इस बार शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य से भी कम भाव
पर गेहूं की खरीद हो रही है। किसानों की दिक्कत यह भी है कि अपने बचे गेहूं
को वो परिवार का पेट पालने के लिए घर पर रखें या साहूकारों का कर्ज उतारने
के लिए मंडी लेकर जाएं।
किसानों पर एक के बाद एक मुश्किल आ रही है। मौसम की मार ने गेहूं की
पैदावार को 50 प्रतिशत तक प्रभावित किया है। इसके बाद फसल से जो भी गेहूं
निकल रहा है, उसका या तो रंग खराब है, या फिर वह बहुत पतला है। इसके चलते
मंडी व्यापारी उसे खरीदने से भी गुरेज कर रहे हैं। मारहरा के किसान गजेंद्र
सिंह, मुकेश कुमार ने बताया कि उन्हें गेहूं का भाव अच्छा न मिला तो इस
घाटे से वो दो सालों तक नहीं उभर पाएंगे। किसानों की मानें तो बाजार में
गेहूं 1350 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। जबकि शासन का समर्थन मूल्य
1450 रुपये है। किसानों को शासन का समर्थन मूल्य भी रास नहीं आ रहा है।
सरकार की मुआवजा नीति विफल
किसानों
की मदद का दम भरने वाली सरकार की मुआवजा नीति पूरी तरह से विफल साबित हो
रही है। उन किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है जिनकी फसलों को 50 प्रतिशत या
उससे अधिक का नुकसान हुआ है। ऐसे किसानों को प्रशासन की ओर से 18 हजार
प्रति हेक्टेयर के हिसाब से चेक दिए जा रहे हैं। किसानों के अनुसार उनके
लिए यह मुआवजा राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। सूत्रों की मानें तो
शासन की गाइड लाइन के अनुसार प्रशासन दो हेक्टेयर तक के नुकसान वाले
किसानों को ही मुआवजा राशि दे रहा है। इसके चलते जिन किसानों की दो
हेक्टेयर से ज्यादा गेहूं की फसल तबाह हुई है, उन किसानों के आंसू सरकार
नहीं रोकेगी।
पिछले साल का मुआवजा भी नहीं मिला
इस साल रबी की
फसलों में मौसम की मार से जो बर्बादी हुई है, पहले कब हुई किसानों और कृषि
विभाग को ठीक तरह से याद नहीं है। हालांकि जिले में सूखा की मार किसानों को
कई बार पड़ चुकी है। इससे खरीफ की फसलें बुरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं।
गत वर्ष पड़े सूखा की वजह से शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया था और
मुआवजा देने की घोषणा भी की थी, लेकिन सूखा राहत का वह मुआवजा आज तक शासन
किसानों को मुहैया नहीं करा पाया है।