नोट बंदी किसानों पर भारी पड़ रही है। जहां पुराने नोट के चलते उन्हें नकद में भी उन्हें गेहूं का बीज नहीं मिल पा रहा। वहीं, उधार में भी बीज देने को मना किया जा रहा है। इसके चलते गेहूं की बुआई लगातार पिछड़ रही हैं। अभी तक जिले में दस फीसदी गेहूं की बुआई ही हो सकी है। 30 नवंबर तक का समय अच्छा माना जाता है, लेकिन नकदी न होने से किसान गेहूं के बीजों को नहीं उठा पा रहे हैं। अभी तक मात्र 200 क्विंटल बीजों का ही उठान हुआ है।
गेहूं की फसल मुख्य फसलों में हैं। इस फसल से जहां किसान वर्ष भर के लिए अन्न का इंतजाम करता हैं, वहीं पशुओं के लिए भूसा का इंतजाम भी इसी फसल से होता है। इसके लिए किसान एड़ी चोटी का जोर लगाता है, लेकिन नोट बंद के कारण किसान मुसीबत में आ गए हैं। उनके लिए परेवट करना, जुताई कराना, खाद एवं बीजों की बुआई करने में परेशानी हो रही है। अधिकतर किसानों के खाते ही नहीं हैं। नोट बदलने में भी मात्र 2000 रुपये ही बदले जा रहे हैं। इससे लगातार ही गेहूं की फसल की बुआई पिछड़ रही है। बुआई के लिए दस दिन ही शेष रहे हैं। जनपद में 99 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई होती है। इसकी तैयारियों के लिए राजकीय बीज गोदामों 850 क्विंटल बीज की उपलब्धता की गई, जबकि अभी तक मात्र 200 क्विंटल गेहूं ही किसानों ने उठाया है।
किसान बोले-
किसानों के पास पहले चलने वाले पुराने नोट हैं। वहीं, बैंकों से धन की निकासी टेढ़ी खीर हो गया है। किसान के हाथ में पैसा नहीं है। इससे बुआई पिछड़ रहा है।
- रामकिशोर, किसान, इटौआ
दो बार खेत की परेवट कर बुवाई की तैयारी की है, लेकिन बुआई नहीं हो पा रही। पुराने नोट कोई लेता नहीं, मैं बीमार हूं। बैंक में लंबी लाइन हैं, क्या करें।
- कुमरपाल, किसान इटौआ।
अधिकारी ने कहा-
राजकीय बीज गोदामों से गेहूं के बीज खरीद में 500 एवं1000 रुपये के नोट स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा छूट नहीं दी गई हैं। जिलाधिकारी से वार्ता कर चेक से भुगतान करने की व्यवस्था की गई हैं। - सुमित कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।