नहर, नाले एवं नदियों के पुलों की मरम्मत की कभी गंभीरता नहीं दिखाई जाती। टूटी रेलिंग, जर्जर और गड्ढे से भरी इनकी सड़कें हादसे का सबब बनी हुई हैं। हादसों के बाद भी विभागीय अधिकारी जाग नहीं रहे हैं।
देखें तो कासगंज-सिकंदराराऊ मार्ग पर दो नहर बहतीं हैं। इन नहरों के पुल जर्जर हो चुके हैं। एक पुल की तो रेलिंग ही टूटी है। सड़क में भी गड्ढे हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। इसी पुल से होकर गुजरने वाले बिलराम गेट मार्ग की हालत भी खस्ता है। नहर पर बने झाल के पुल के निकट भी तमाम गड्ढे हैं। इसी तरह
गोरहा नहर से होकर सहावर की ओर जाने वाला मार्ग सकरा और बदहाल है। इस नहर मार्ग पर भी हादसे से बचने के इंतजाम नहीं हैं। नहर के किनारे रेलिंग तक नहीं लगी है। जबकि इससे कई बार हादसे हो चुके हैं। फिर भी विभागीय अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है।
किसान काट लेते हैं खंदी
नहर के किनारे स्थित गांवों के किसान फसलों में सिंचाई के लिए खंदी काट लेते हैं। इससे रात के समय दुर्घटनाएं होती रहती है। अंधेरे में खंदी दिखाई न देने पर अक्सर खतरा होता रहता है।
नहर में वाहनों के गिरने से हुए हादसे
-काली नदी में बस गिरने से गई थीं 20 लोगों की जान
-चांड़ी के निकट नहर में बस गिरने से हुई थी 50 की मौत
- चांड़ी के निकट स्पेशियो नहर में गिरने से चालक एवं महिला की हुई थी मौत
- गोरहा नहर में भनुपुरा के निकट नैनो के नहर में गिरने से चालक की हुई थी मौत
- हजारा नहर में टेंपो पलटने से छह लोगों की गई थी जान