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Etah News: दिवाली पर पटाखों का शोर कहीं कानों को न कर दे कमजोर

Wed, 30 Oct 2024 11:57 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन और दीप जलाने के बाद लोग पटाखे फोड़कर खुशी मनाते हैं, लेकिन तेज आवाज वाले पटाखे कानों के लिए खतरनाक हैं। इससे सुनने की क्षमता पर गहरा आघात होता है। सामान्य ध्वनि का मानक 50 डेसिबल है लेकिन दिवाली पर जो पटाखे इस्तेमाल हो रहे हैं वह इससे कई गुना अधिक की आवाज करते हैं।
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कान के लिए 50 डेसिबल तक की आवाज सामान्य होती है। इससे अधिक आवाज खतरनाक है। पटाखे में 120 से 150 डेसिबल तक की आवाज होती है। डॉक्टर का मानना है कि इतनी आवाज कान के पर्दे खराब करने के लिए काफी है। कान का पर्दा बेहद नाजुक होता है, इतनी तेज आवाज बर्दाश्त नहीं कर सकता। खासतौर से बच्चों में यह समस्या अधिक हो सकती है। पटाखा बहुत ज्यादा नजदीक फट जाए तो उससे भी कान में सीटी बजने का अनुभव होता है। यह कान की क्षमता से अधिक ध्वनि के पहुंचने के कारण होता है।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक सचिन अग्रवाल ने बताया 70 डेसिबल की आवाज अगर लगातार सुनते रहें तो कान में समस्या हो सकती है। 120 से 150 डेसिबल से ज्यादा पटाखे की आवाज है तो कम से कम 5 मीटर की दूरी बनाने में ही समझदारी है। सरकार ने 125 डेसीबल तक की अनुमति दी है। लेकिन पटाखे इससे कहीं अधिक आवाज की आ रहे हैं।
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हो सकता है स्थायी बहरापन
चिकित्सक ने बताया कि कान के अंदर बेहद जरूरी अंग काॅकलिया होता है। लगातार पटाखों की आवाज सुनने से उसके खराब होने की आशंका रहती है। खराब होने पर स्थायी बहरापन हो सकता है। इसलिए कम आवाज वाले पटाखे को जलाना चाहिए और कोशिश की जाए तो आसमानी पटाखे जलाएं। इससे धमाकों की आवाज कम आएगी। नवजात शिशुओं के कान में रुई लगा दें ताकि आवाज कम जाए।
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