नोट बंदी का असर कारोबार और कारोबारी ही पर नहीं है। नोट बंदी का व्यापक असर गांव गांव में देखने को मिल रहा है। किसान न बैंकों में अपने बड़े नोट जमा कर पा रहा है और न ही जरूरी खर्चों के लिए नोट बदल पा रहा है।
पूरे जिले में साढे़ चौदह लाख की आबादी के बीच कुल 82 बैंक शाखाएं संचालित हैं। किसानों को ग्रामीण आंचल में संचालित बैंक शाखाओं से किसानों की न तो पर्याप्त नकदी बदल पा रही है और न हीं उनके नोट जमा हो पा रहे हैं। गल्ला मंडी में 9 नवंबर से कारोबार ठप है। कृषि विभाग के केंद्रों पर गेहूं के बीज की उपलब्धता है लेकिन 500 और 1000 के नोट बीज केंद्रों पर स्वीकार नहीं किए जा रहे। कृषि विभाग ने तो 500 और 1000 के नोट स्वीकार न करने के संबंध में नोट भी चस्पा कर रखा है। ढोलना, बिलराम, मोहनपुरा, सोरों, सहावर, अमांपुर, सिढपुरा, भरगैन, दरियावगंज, गोरहा सहित तमाम इलाकों में किसान बैंकों में कतार लगाए हैं लेकिन बैंकों में नकदी का संकट है जिससे किसानों केा नोट बदलने में सफलता नहीं मिल रही।
बारी आई तो रुपये हुए खत्म
पटियाली। सेंट्रल बैंक लाइन में लगी म्याऊं गांव की रामवती तीन दिन से बैंक शाखा पर आ रही है लेकिन चार हजार रुपये नहीं बदल पा रहे। वृद्धा रामवती ने बताया कि उनके दामाद कैंसर पीड़ित हैं। उसे दामाद को देखने जाना है। बैंक में जब उसकी बारी आई तो उससे पहले ही बैंक रुपया खत्म हो गया।
डाकघर से नहीं मिला पैसा
पटियाली। डाकघर में दो दिन से बीमार पत्नी के इलाज और खेती की जरूरत के लिए पैसे बदलने के लिए पहुंच रहे कोड़ा गांव के पुष्पेंद्र को अभी तक नोट बदलने में सफलता नहीं मिली है। उसने बताया कि वह दो दिन से वापस जा रहा है। मंगलवार को भी डाक घर में आया ढाई लाख रुपया भी बंट गया। पुष्पेंद्र ने बताया कि उसका गांव पटियाली से 12 किमी दूर है। उसे इतनी दूर आना जाना पड़ता है।
नहीं बिक पा रहा गल्ला
कासगंज। अमांपुर क्षेत्र के ग्रामीण कुुंवरपाल ने बताया कि गल्ला मंडी में छोटे नोट उपलब्ध नहीं है जिसके कारण गल्ले की बिक्री बंद है। किसान बड़े नोटों के बदले कैसे अपना गल्ला बेचे। किसान की समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। वहीं तराई के किसान लखविंदर सिंह ने कहा कि नोट बंदी के फैसले से किसान वर्ग काफी प्रभावित है।