चामुंडा माता मंदिर परिसर में देर सायं कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर दीपकों की दीपमाला से जगमग हुए परिसर का वातावरण ऐसा बना कि मानों देवता ही उतर आए हों। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिसर में पहुंचकर देवदर्शन किए और प्रभु की भक्ति की।
कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली माना जाता है और कार्तिक पूर्णिमा के साथ ही दीपोत्सव का दौर भी बंद हो जाता है। देव दीपावली के दिन देवों की आराधना की जाती है। चामुंडा मंदिर परिसर में देव दीपावली मनाने के लिए भव्य तैयारियां की गईं। परिसर में हजारों दीपकों की दीपमाला सजाई गई। पूरे मंदिर परिसर में चारों ओर दीपकों की जगमग से मनोहारी छटा उभरकर आई। जमीन पर आकर्षक रंगोलियां सजाई गईं और इन रंगोलियों को भी दीपकों से सजाया गया। देर रात्रि आतिशबाजी का प्रदर्शन भी किया गया। इसके बाद प्रसाद वितरण, भंडारे का श्रद्धालु भक्तों के द्वारा आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारी अनेकपाल सिंह इस मौके पर काफी व्यवस्थाएं बनाईं। श्रद्धालु देव दीपावली की जगमगाहट व भक्ति में डूबे नजर आए। आतिशबाजी भी देव दीपावली के मौके पर जलाई जिससे आसमान भी सतरंगी आतिशबाजी से रोशन हो उठा।