जिले में जानलेवा बने बुखार का कहर कायम है। एक महीने में इससे 14 लोगों की जान जा चुकी है। गांव-गांव मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया के मरीज हैं। अस्पतालों में बीमारों की भीड़ लगी है। रोजाना रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। पर, स्वास्थ्य महकमा संक्रामक रोगों के नियंत्रण में अब तक नाकाम ही रहा है।
गंगा की तराई का इलाका होने के कारण कासगंज संक्रामक बीमारियों के लिए बेहद संवेदनशील है। इन दिनों गांव-गांव मलेरिया,डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल फीवर की बीमारी फैली भी है। बुखार तो जानलेवा बन चुका है। महीनेभर के भीतर ही इसकी चपेट में आने से 14 लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार को आवास विकास कालोनी की बुखार पीड़ित रेखा को गंभीर अवस्था में सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहा है। तराई क्षेत्र में जलभराव से मलेरिया, बुखार व अन्य बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है। जिले में डेंगू, फाल्सीफेरम एवं चिकिनगुनिया के कई केस सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण अंचल के बीमारों को हैं। सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों का टोटा होने से लोग इलाज को भटक रहे हैं। पटियाली इलाके के लोगों को इलाज के लिए कायमगंज, फर्रुखाबाद जाना पड़ रहा है।
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गांवों में फागिंग, प्रभावित इलाकों में होगा कैंप
कासगंज(ब्यूरो)। जिलाधिकारी के. विजियेंद्र पांडियन ने बताया है कि वायरल बुखार का प्रकोप है। डेंगू और चिकिनगुनिया के मामले सामने नहीं आए हैं। अप्रशिक्षित चिकित्सक लोगों को डेंगू बताकर भयभीत कर देते हैं। कभी मोहल्ले और गांवों में फागिंग कराने, सीएमओ को प्रभावित क्षेत्रों में कैंप आयोजित करके बीमारों के इलाज का निर्देश दिया गया है।