मलावन निवासी शिक्षक रामगोपाल शाक्य का विगत 27 फरवरी को सकीट थाना क्षेत्र के कुंजपुर गांव के पास से ड्यूटी से लौटते वक्त बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। बदमाशों ने शिक्षक के परिवारीजनों से पच्चीस लाख रुपये फिरौती मांगी थी। परिवार 15 लाख रुपये फिरौती देने के लिए तैयार था, लेकिन फिरौती पहुंचने से पहले ही पुलिस ने मैनपुरी जिले के बिछवा थाना अंतर्गत लहरा गांव के एक मकान से मंगलवार सुबह शिक्षक को बरामद कर लिया। यहां से पांच अपहर्ताओं को भी दबोच लिया। जबकि दो पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहे।
एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मलावन निवासी शिक्षक राम गोपाल शाक्य का अपहरण बदमाशों ने 27 फरवरी को कुंजपुर गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय से ड्यूटी कर लौटते वक्त किया था। पुलिस का दावा है कि बदमाश परिवार पर लगातार 25 लाख रुपये फिरौती देने का दबाव बना रहे थे। लेकिन सर्विलांस पर लगे नंबर से पुलिस बदमाशों को ट्रेस करने में सफल हो गई। पुलिस का दावा है कि शिक्षक के परिवारीजन शिक्षक को मुक्त करने के एवज में 15 लाख रुपये देने को तैयार हो गए थे, लेकिन इसी बीच पुलिस बदमाशों की लोकेशन ट्रेस कर मैनपुरी जनपद के बिछवा थाना अंतर्गत लहरा गांव निवासी रामवीर के घर पहुंच गई। यहां से शिक्षक रामगोपाल यादव एक कमरे में जंजीरों से बंधे हुए थे। पुलिस ने उन्हें बंधन मुक्त कराया। यहां से पांच बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो बदमाश शिक्षक की बाइक समेत भागने में सफल रहे। पकड़े गए अपहर्ताओं में रामवीर, हिस्ट्रीशीटर नरेश निवासी गढ़िया कोची सकीट एटा, मोनू उर्फ यादवेंद्र निवासी एमा हसन नगर बरनाहल मैनपुरी, सुभाष और शैलेंद्र निवासी कुंजपुर शामिल हैं। पुलिस ने अपहर्ताओं के पास से एक तमंचा और कारतूस भी बरामद किए हैं।
शिक्षक की सकुशल बरामदगी पर फूलमालाएं पहनाई
शिक्षक रामगोपाल शाक्य की सकुशल बरामदगी पर मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा, शिक्षक संघ और बसपा कार्यकर्ताओं ने एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी को फूल माला पहनाकर
स्वागत किया। भाजपा नेता डेविड विपिन वर्मा, बसपा नेता गजेंद्र सिंह चौहान उर्फ बबलू और शिक्षक नेता और शिक्षक समेत अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अपहरण के मास्टर माइंड प्रधान को छोड़ा
मलावन निवासी शिक्षक रामगोपाल शाक्य के अपहरण साजिश सकीट ब्लॉक क्षेत्र के एक प्रधान ने राशन डीलर और ग्रामीण को फंसाने के लिए रची थी। पुलिस सूत्रों की माने तो यदि सीओ सकीट मामले को गंभीरता से नहीं लेते तो राशन डीलर अपहरण के मामले में जेल जाता। सीओ सकीट ने प्रधान और उसके दो साथियों को दबोच कर सख्ती से पूछताछ की तो प्रधान ने अपहरण की पूरी कहानी उलग दी। जबकि पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर अपहरण के साजिशकर्ता प्रधान को न केवल छोड़ दिया बल्कि इस घटनाक्रम से दूर रखा है।