एटा। गुरुवार रात पहले बच्चे का गांव के अस्पताल में प्रसव होने के बाद दूसरा बच्चा टेढ़ा होने पर चिकित्सक ने पीड़ित को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला महिला अस्पताल में ऑपरेशन के नाम पर सुविधा शुल्क मांगा गया। पीड़ित के पति ने कुछ रुपये दिए लेकिन उसे अस्पताल से भगा दिया गया। पति पत्नी को रिक्शे पर बैठा कर घर लौटने लगा तो रास्ते में नन्नूमल चौराहे पर महिला को दूसरा प्रसव हो गया। हालत बिगड़ी तो आधा घंटे में पहुंची एंबुलेंस से महिला और नवजातों को दोबारा महिला चिकित्सालय ले जाया गया।
समदा नगल खड़उआ निवासी हरिओम की पत्नी रीना को गुरुवार शाम प्रसव पीड़ा होने पर गांव के अस्पताल में भर्ती कराया। हरिओम ने बताया कि पहला प्रसव गांव में होने के बाद चिकित्सक ने दूसरा बच्चा टेढ़ा बताकर जिला महिला अस्पताल भेजा दिया। जब हरिओम पत्नी को लेकर महिला अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सक ने ऑपरेशन बताते हुए चार हजार रुपये सुविधा शुल्क मांगा। हरिओम और उसकी मां भगवती की माने तो चिकित्सक को दो हजार रुपये देते रहे, लेकिन चिकित्सक ने अस्पताल से भगा दिया। हरिओम नवजात और पत्नी को रिक्शे में बैठाकर प्राइवेट अस्पताल दौड़ा, लेकिन नन्नूमल चौराहे पर रीना ने चलते रिक्शे में दूसरे बेटे को जन्म दिया। रीना की हालत बिगड़ी तो हरिओम ने 108 एंबुलेंस बुलाई, आधा घंटे बाद एंबुलेंस से प्रसूता को महिला चिकित्सालय ले जाया गया। इस बीच इलाके की महिलाओं ने प्रसूता पर कपड़े लाकर डाले और नवजात को कपड़े में लपेट कर सुरक्षित किया।
महिला चिकित्सालय में गंदगी का अंबार
देर रात अमर अमर उजाला टीम जिला महिला चिकित्सालय पहुंची तो रीना की सास भगवती देवी दोनों नवजात को गोद में लेकर ऐसे कमरे में बैठी जहां गंदगी का अंबार लगा था। फर्श पर गंदगी के साथ कोने में गंदगी से भरा डस्टबिन पड़ा था। कमरे में भर्ती मरीजों ने कहा कहने पर भी कमरे में सफाई नहीं कराई गई।
मामला संज्ञान में आ गया है। मरीज अटेंड करने वाली महिला चिकित्सक पर सख्त कार्रवाई होेगी। सीएमएस को दोनों नवजात और प्रसूता की कम से कम अस्पताल में भर्ती कर केयर करने के निर्देश जारी किए गए हैं। महिला का पति लिखित में शिकायत दे रहा है।
- डा. आरसी पांडेय, सीएमओ एटा