महंगाई में गरीबों के सामने अपना पेट भरने की चुनौती हो गया है। बाजार में न दाल सस्ती हैं और न हीं हरी सब्जियां। सभी महंगाई की चपेट में है। बढ़ती कीमतों ने लोगों के होश उड़ा रखे हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा कि आखिर वह खाएं क्या!
आम आदमी को अपना भोजन करने के लिए दाल या सब्जी कुछ तो चाहिए, लेकिन यहां कुछ भी सस्ता नहीं हैं। चार साल पहले तक सभी दालें 50 रुपये किलो तक की कीमत में बाजार में उपलब्ध हो जाती थी। जिससे आम आदमी दालों को आसानी से अपनी थाली का हिस्सा बना लेता। सब्जियों के दाम भी सामान्य रहने से लोग इनका भी भरपूर सेवन कर लेते, लेकिन अब लोगों को घर में दाल या सब्जी बनतो समय सोचना पड़ता है। जबसे दलहन में तेजी का रुख आया है तब से दाल की कीमतें तेजी से उछली हैं। आज दालों की कीमतें 180 रुपये किलो के भाव तक पहुंच चुकी हैं। बाजार में सभी सब्जियां महंगी हो चुकी है। सब्जियों के दाम तो दोगुने से अधिक तक बढ़ चुके हैं। चीनी, घी, तेज सभी कुछ महंगा हो चला है, जिससे लोग परेशान हैं।
कासगंज। महंगाई के दौर में सब्जियों के राजा की चाल भी टेड़ी हो गई है। सीजन में चार रुपये किलो बिकने वाला आलू 20 रुपये किलो के भाव पर पहुंच चुका है। आगे आने वाले समय में इसकी कीमतों में और भी तेजी आने की संभावना हैं।।
कासगंज। सेहत बनाने के लिए सलाद बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन गरीबों के लिए तो यह सपने जैसा हो गया है। कीमतों में काफी तेजी आ चुकी है। 10 रुपये किलो बिकने वाला खीरा 40 रुपये के भाव पर पहुंच गया है। जबकि चुकंदर भी 40 से बढ़कर 100 रुपये किलो पहुंच चुका है।
कासगंज। महंगाई के दौर में गरीबों के लिए चटनी के भी लाले हो गए हैं। बाजार में धनिया 100 रुपये किलो एवं हरी मिर्च के भाव 50 रुपये किलो तक जा पहुंचे हैं। कच्चा आम भी 15 रुपये किलो तक बिक रहा है।
आज महंगाई ने आम आदमी के बजट को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। आय से अधिक महंगाई बढ़ रही है, जिससे समझ में नहीं आता क्या खाएं, क्या न खाएं।
-राजकुमारी गृहणी
दाल की कीमतों में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। कीमतों में काफी उछाल आ चुका है। कीमत बढ़ने से बिक्री भी प्रभावित है।
- अनिल माहेश्वरी कारोबारी
मंडी में सब्जियों की आवक कम हो जाने से तेजी का रुख बना हुआ है। मौसम में गर्मी अधिक रहने से हरी सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
- कुमरेश, सब्जी विक्रेता