मिरहची। क्षेत्र में बिना किसी एनओसी और आपात स्थिति से निपटने के इंतजाम बिना कई स्वीमिंग पूल चल रहे हैं। महज गड्ढा खोदकर इन्हें बना दिया गया है। जहां डूबते लोगों को बचाने के लिए तैराकी विशेषज्ञ तक नहीं हैं।गर्मी के मौसम में पारा काफी ऊपर चढ़ गया है। लोगों को गर्मी में राहत दिलाने के नाम पर क्षेत्र में कई स्थानों पर मानक विहीन स्वीमिंग पूलों का संचालन किया जा रहा है। बाकायदा सोशल मीडिया पर इनका प्रचार भी किया जा रहा है। इन स्वीमिंग पूलों में कोई हादसा होने पर बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं। यही नहीं, संचालकों की ओर से डीजे की तेज धुन पर पानी में झूमने की व्यवस्था भी कर रखी है। ऐसे में कोई हादसा होता है तो तेज आवाज की वजह से चीखने-चिल्लाने की आवाज भी दब जाएगी।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर स्वीमिंग पूल के संचालक एक साथ 25 से 50 लोगों को प्रवेश दे देते हैं। एक घंटे की मस्ती के लिए प्रवेश शुल्क के नाम पर 50 से 60 रुपये लिए जाते हैं। लेकिन सुरक्षा मानकों की बात करें तो दुर्घटना से बचाव के लिए लाइफ गार्ड जैकेट तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं पूल में भरा पानी सप्ताह में एक बार ही बदला जाता है। जिससे बीमारियों का खतरा भी हो सकता है।
पूल संचालन के लिए फायर ब्रिगेड और पुलिस कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इन विभागों से एनओसी मिलने के बाद जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में निर्धारित पंजीयन शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से मानकों की जांच होती है और जांच में सभी मानक पूरे पाए जाने पर अनुमति दी जाती है। थाना प्रभारी कृष्णकांत लोधी का कहना है कि पूल संचालकों के पास एनओसी है अथवा नहीं, इसकी जानकारी खेल विभाग से कर जांच की जाएगी।