राजकीय प्रदर्शनी में सोमवार को मुशायरे का आयोजन हुआ। मुशायरे में जिले के अजीम शायरों ने शिरकत कर अपना कलाम पेश किया। मुशायरे के शौकीनों ने भी तालियां बजाकर शायरों की हौसलाअफजाई की। लोगों की ओर से आई फरमाइश को भी शायरों ने सुनाया।
कार्यक्रम का आगाज मुख्य अतिथि दिल्ली पुलिस के डीआईजी अंशुमान यादव, पालिका चेयरमैन राकेश गांधी, समाजसेवी मेघावृत शास्त्री, राहुल गुप्ता, फरमान कुरैशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुशायरे का आगाज काबिश कासगंजबी ने अपनी शायरी, ‘घटाने हैं दिलों के अगर फासले, अपने लहजे में चाहत का रस घोलिए।’ इसके बाद राकेश जैन कासगंजबी ने ‘मेरा मजहब मेरा ईमान कहता है, दिल की धड़कनों में मेरा हिंदुस्तान रहता है।’ डा. चौधरी आलम एटबी ने ‘दिलों में दूरियां रखता है पागल हो गया है, मेरी मजबूरियां तकता है पागल हो गया है’ सुनाकर महफिल में वाहवाही लूटी। एमआई खान पंवास एटा ने ‘न रखो वास्ता वतन के गद्दारों से, कातिल हैं किसी मजहब से क्यों जोड़ते हो।’ राजू नादान एटबी ने ‘अब वक्त है दिलों को मिलाने की बात कर, रूठे हुओं को फिर से मनाने की बात कर।’ कल्पना मौर एटबी ने ‘जन्नतें मुहब्बत को यूं न बेरंग करो, लहू एक है दिलों की एकता न भंग करो।’ सधा यादव ने ‘हम सिसकते रहे आप आए नहीं, जख्म दिल के मेरे क्यों सहलाए नहीं।’ दिलशाद उरुज कासगंजबी ने ‘पता नहीं कि वो वादा निभा भी पाएंगे, कभी तो हां कभी ना से पता नहीं चलता।’ डा. सैयद सदाकत अली जलेसर ने ‘तेरे चेहरे की झलक आंखों में मेरी आज भी है, वो मुहब्बत की कसक दिल में मेरे आज भी है।’ सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के संयोजक जीशान कुरैशी ने अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मनित किया। मुशायरे की निजामत कशिश एटबी ने की। सह संयोजक नवेद कुरैशी, राहुल वर्मा, सुमित भारद्वाज, प्रशांत गुप्ता, डा. जाहिद खान, मोहम्मद तारिक, मोनू, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद अनस, मोहम्मद शादाब, आकांश पवार, दुर्गेश यादव शानू सैफी समेत अनेक लोग मौजूद रहे।