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जमीन घोटाला : विवाद के साथ ही गायब हो जाते हैं अभिलेख

Sun, 29 Dec 2024 11:05 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। सरकारी जमीन के जमकर घोटाले हो रहे हैं। कहीं बड़े तो कहीं छोटे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। खास बात तो यह है कि जैसे ही शिकायत आती है, इन जमीनों के अभिलेख ही गायब हो जाते हैं। ऐसे में जांच लंबित रह जाती हैं और जमीनों पर कब्जा जमाने वालों को न्यायालय जाकर प्रक्रिया को फंसाने का मौका मिल जाता है।
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ताजा मामला कासगंज रोड स्थित हिंदुस्तान यूनीलिवर लि. फैक्टरी की जमीन का चर्चा में है। इसके लिए 1961 में करीब 155 बीघा सरकारी जमीन कंपनी के नाम की गई थी। यहां फैक्टरी चली थी और तमाम लोगों को रोजगार मिला। एक समय यह फैक्टरी एटा की पहचान हुआ करती थी। बाद में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद दूसरी कंपनी इस जमीन पर चलीं, लेकिन लंबे समय तक संचालित नहीं हो सकीं।
अब जमीन खाली पड़ी है। अंदरखाने इसका सौदा हो गया। असरौली की ग्राम प्रधान मीरा देवी का कहना है कि जमीन नॉन जेड ए श्रेणी की है, जिसको बेचा या प्रकृति परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी अन्य जमीनों के मामले सामने आए हैं, जब जांच के दौरान अभिलेख ही गुम मिले। गंभीर बात यह भी है कि किसी मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई।
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केस 1: शीतलपुर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कासिमपुर के गांव बहादुरगढ़ में करीब छह दशक पहले मनमाने ढंग से नियम विरुद्ध पट्टे कर दिए गए। दूसरे गांव की महिला को भी पट्टा दिए जाने की शिकायत हुई। जांच में पता लगा कि इस महिला सहित सभी पट्टों की पत्रावली तहसील से लापता है।
केस 2: शहर के लालपुर इलाके में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की बाढ़ है। शिकायत और सूचना का अधिकार के जरिए जब सवाल पूछा गया कि संबंधित गाटा संख्या में सड़क की चौड़ाई और रकबे की क्या स्थिति है, तो अभिलेखागार से इसकी जानकारी ही नहीं मिली। यहां भी नक्शे में घालमेल की आशंका जताई गई है। यदि नक्शा स्पष्ट होता तो अवैध कब्जों की पोल खुल जाती।
केस 3: शीतलपुर ब्लॉक क्षेत्र में कासगंज रोड स्थित करीब 155 बीघा जमीन जमीन हिंदुस्तान यूनीलिवर लि. को फैक्टरी स्थापना के लिए दी गई थी। बाद में यह फैक्टरी बंद हो गई। अन्य फैक्टरी भी इस जमीन पर चलीं। करीब दो साल से यहां सन्नाटा छाया हुआ था। चुपके से इस जमीन को बेच दिया गया और पुरानी बिल्डिंग की तोड़फोड़ होने लगी। शिकायत पर जांच शुरू हुई तो इसके अभिलेख भी तहसील से गायब हो गए।
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