रामवृक्ष पुलिस का सख्त विरोध करता था, उसके लिए अमर्यादित और अभद्र भाषा का प्रयोग करता। पुलिस अधिकारी जैसे जवाहर बाग में घुसने का प्रयास करते तो हालात टकराव के बन जाते थे, लेकिन कुछ पुलिस कर्मी ऐसे भी थे, जिनके जवाहर बाग में आने जाने पर कोई रोक-टोक नहीं थी और इनकी रामवृक्ष के साथ अलग ही खिचड़ी पकती थी। इनके लिए अक्सर जवाहर बाग से टिफिन जाता था, मामला उछलने से पहले तो यह अक्सर देर रात को जवाहर बाग में ही खाना खाते आते थे। यह भी माना जा रहा है कि यह हिंसा के सूत्रधार को पुलिस की सूचना भी देते थे। सवाल यह भी है कि आखिर इन भेदियों का भेद अफसरों को क्यों नहीं लगा।
यह खुलासा मथुरा से एटा जेल में शिफ्ट की गई महिला बंदियों ने किया है। गोंडा निवासी लालिमा (28) ने बताया कि जवाहरबाग की रसोई में कब्जाधारियों के खाने में से पुलिसकर्मियों के लिए भी टिफिन पैक होते थे। रामवृक्ष के गुर्गों के मोबाइल पर इनकी काल आती और उसके बाद टिफिन बाग के गेट पर सादे कपड़े पहने युवक ले जाते थे। महिला बंदी लज्जावती ने कहा कि कभी-कभी पुलिस वाले देर रात को जवाहरबाग में आकर खाना खाते थे। उसने बताया कि सर्दियों में रामवृक्ष के गुर्गे रामशरण ने रसोई के पास हाथ सेकते समय पुलिसकर्मी का फोटो खींच लिया था, पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल भट्ठी में डालने के बाद पिटाई लगाई थी। इसके बाद वह आठ हजार रुपये चुराकर चुपचाप भाग गया था। जवाहरबाग गेट पर बाकायदा रजिस्टर में नाम दर्ज कर पहरेदारी के लिए ड्यूटी लगाई जाती थी। पहरेदार जवाहरबाग में रहने वाली महिलाओं, युवतियों और बच्चों की गतिविधियों पर हर समय नजर रखते थे।
महिलाओं को थमा दिए थे लड़ने को डंडे
महिला बंदियों ने बताया कि जिस वक्त जवाहरबाग में फायरिंग और हिंसा हुई वह सब अपनी झाेंपड़ी थे। रामवृक्ष के गुर्गों ने उन्हें डंडे लाकर दिए और जवाहरबाग गेट पर चलने को कहा, लेकिन कुछ देर बाद वहां भगदड़ मच गई। इसी भगदड़ में वह भी डंडे फेंककर भाग ली थी।
पूजा और मेकअप करने का होता था विरोध
रामवृक्ष जवाहर बाग में रहने वाले कब्जाधारियों को पूजा-पाठ करने से रोकता था। महिलाओं को मेकअप करने की भी मनाही थी। पिंकी (55) और लज्जावती (48) ने बताया कि महिलाओं को जवाहरबाग में पूजा पाठ करने की इजाजत नहीं थी। रामवृक्ष के गुर्गों ने कई बार हवन-सामग्री और मेकअप का सामान उठाकर झाेंपड़ी से फेेंक दिया था।