एटा। जलेसर क्षेत्र में घुंघरू-घंटों का काम बड़े स्तर पर होता है, लेकिन ताज ट्रिपेजियम जोन के कारण नई इकाइयों की स्थापना नहीं हो पा रही। दो साल पहले मिनी औद्योगिक आस्थान के लिए प्रस्ताव भेजा गया, जो परवान नहीं चढ़ सका। अब नए सिरे से प्रस्ताव बनाने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि टीटीजेड क्षेत्र से बाहर आस्थान बनाया जाए तो उसमें ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) के तहत नई इकाइयां स्थापित हो सकेंगी।
जलेसर की घुंघरू-घंटा इकाइयों में पारंपरिक रूप से कोयला भट्ठियों पर काम होता है, लेकिन टीटीजेड में होने के कारण इन भट्ठियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में तमाम बड़ी इकाइयां बंद पड़ी हैं। छोटे स्तर पर लोग घरों से काम कर लेते हैं। जबकि प्रदेेश सरकार की ओर से जलेसर के घुंघरू-घंटा आदि पीतल उत्पादों को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। प्रोत्साहन के जरिये इसे बढ़ावा देने के निर्देश दिए जाते हैं। नई इकाइयां खुलवाने के लिए अनुदान की व्यवस्था भी हर साल की जाती है, लेकिन टीटीजेड की बंदिश के कारण निर्माण इकाई स्थापित नहीं हो पा रहीं। ऐसे में उद्योग केंद्र जलेसर के लिए मिनी औद्योगिक आस्थान की रूपरेखा बना रहा है। हालांकि दो साल पहले इस संबंध में पहल की गई थी, जो जमीन की उपलब्धता न होने के कारण कामयाब नहीं हो सकी।