जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में मरीजो की लगी भीड़ ।संवाद
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आंखों के लिए धूल और धुआं घातक होता है, लेकिन शहर में हर तरफ कार्य के चलते धूल उड़ रही है। इससे लोगों की आंखों में दिक्कत आ रही है। चिकित्सकों का कहना है आंख में धूल जाने से नेत्र रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
शहर में सीवर लाइन डालने का कार्य चल रहा है। इसके चलते शहर की अधिकांश सड़के खुदी पड़ी हैं। इन सड़कों से उड़ने वाली धूल के कारण लोग नेत्र रोग का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र परीक्षण अधिकारी सोहनलाल शर्मा का कहना है। अस्पताल में उनके पास 175 से 200 मरीज प्रतिदिन नेत्र रोग के पहुंचते हैं।
जहां 50 प्रतिशत मरीज एलर्जी के शिकार होते हैं। उन्होंने बताया एलर्जी रोग आंख में धूल जाने के कारण होता है। कभी-कभी यह रोग कोर्नियां भी खराब कर देता है। ऐसे में व्यक्ति को आंख का ऑपरेशन कराना पड़ता है। उन्होंने बताया एलर्जी के कारण व्यक्ति ग्लूकोमा रोग का शिकार भी हो जाता है।
कैसे होता है ग्लूकोमा रोग
नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि ग्लूकोमा रोग होने पर व्यक्ति के सिर में दर्द की शिकायत रहती है। वहीं काला पानी भी निकलता रहता है। ऐसे में व्यक्ति आंख पर दबाव डालता है इससे व्यक्ति ग्लूकोमा रोग का शिकार हो जाता है।
एलर्जी से बचने के उपाय
दिन में प्रत्येक व्यक्ति को चार से पांच बार साफ पानी से आंखों को धोना चाहिए। बार-बार आंख को मसलने से बचना चाहिए। हो सके तो प्रत्येक व्यक्ति आंख में एंटी एलर्जिक दवा का इस्तेमाल करें।