बरौलिया घाट से ट्रैक्टर-ट्रॉली में बालू भरते लोग। विपिन यादव
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एटा। सरकार भले ही काली नदी से किए जा रहे बालू खनन पर किसी तरह का राजस्व नहीं ले रही है, लेकिन माफियाओं ने इस अवैध कारोबार पर भी कर प्रणाली तैयार कर ली है। मुख्य रास्तों के बजाए ट्रैक्टर-ट्रॉली खेतों से होकर निकाले जाते हैं। यहां से निकलने के लिए 100 रुपये प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली वसूल किए जाते हैं। इसके लिए बाकायदा कुछ लोग लगाए गए हैं।
यूं तो पुल से उतरकर काली नदी का रास्ता है, लेकिन माफियाओं ने गुपचुप ढंग से बालू खनन को अंजाम देने के लिए खेतों से होकर रास्ते बनाए हैं, जो सामान्य तौर पर किसी को नजर नहीं आते। जिन लोगों के खेत हैं, उनकी भी हिम्मत खनन माफियाओं के आगे कुछ बोलने की नहीं पड़ती। जबकि दूसरी तरह के माफियाओं ने बालू परिवहन को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। यहां से बालू भरकर गुजरने वाली हर ट्रैक्टर ट्रॉली से 100 रुपये वसूले जाते हैं। एक ट्रॉली बालू ढाई से तीन हजार रुपये तक में बिक जाती है। इसलिए 100 रुपये देने में किसी को कोई आपत्ति भी नहीं होती। इस तरह के हर रास्ते पर एक-दो लोग वसूली करने के लिए लगाए गए हैं। विरोध की स्थिति बनने पर पूरा गिरोह एकत्रित होकर दबाव बनाने के लिए पहुंच जाता है।
दस दुकानों पर मिली बालू, व्यापारियों को थमाए नोटिस
एटा। अमर उजाला द्वारा अवैध खनन को लेकर लगातार चलाए जा रहे अभियान के मद्देनजर मंगलवार को खनन विभाग की टीम पड़ताल पर निकली। बागवाला से लेकर जैथरा तक भवन निर्माण सामग्री की दस दुकानों पर बालू पाई गई। इसे लेकर इन सभी संबंधित व्यापारियों को नोटिस थमाए गए। खनन निरीक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि इन दुकानों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। इसके बावजूद बालू का भंडारण किया गया है। सात दिन के अंदर उनसे बालू के संबंध में विवरण मांगा है। इतने समय में विवरण न मिलने पर एकपक्षीय रूप से कानूनी कार्रवाई कर दी जाएगी। संवाद
पुलिस के रडार में आए खनन माफिया
जैथरा। खनन माफिया पुलिस के रडार में आ गए हैं। खनन से लेकर वसूली में संलिप्त तीन लोगों के नाम सामने आए हैं। इनकी पुष्टि की जा रही है। साथ ही बड़ी कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। संवाद