जलेसर के एक कारखाने में घंटी बनाते श्रमिक।संवाद
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एटा। देश की आजादी में अहम योगदान निभाने वाले सपूतों की धरा जलेसर में विकास की संभावनाएं बहुत थीं। भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह का साक्षी का यह नगर घुंघरू-घंटा उद्योग से खास पहचान रखता है। इसे एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल तो किया गया, लेकिन अभी तक अपेक्षा के अनुरूप इसे रफ्तार नहीं मिल सकी है। मतदाताओं ने बार-बार जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन नसीब नहीं बदल सके। जलेसर का पीतल उद्योग बस घुुंघरू की तरह बजा तो खूब, लेकिन तरक्की और खुशहाली से दूर ही बना रहा।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के करीब एक साल बाद ही जलेसर के पीतल उद्योग को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल कर लिया गया। इस उद्योग के बढ़ावे के लिए आर्थिक व अन्य स्तर पर मदद की बात कही गई। उम्मीद जगी कि उद्योग बुलंदियों को छुएगा, लेकिन धीरे-धीरे कर समय बीत गया, फिर विस चुनाव आ गया, लेकिन यह उद्योग लगभग वहीं खड़ा है।
गैस आपूर्ति न होना बड़ी समस्या
उद्योग आगे तो बढ़ता लेकिन ग्रहण टीटीजेड का लग गया। जिसके चलते यहां कोयला भट्ठी प्रतिबंधित हैं। जबकि गैस आपूर्ति की व्यवस्था की नहीं गई। ऐसे में नई इकाइयां स्थापित नहीं हो पा रहीं। वहीं पुरानी इकाइयों में भी उत्पादन का झंझट रहता है।