एटा। पशुओं में दूध बढ़ाने के लिए ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे दूध से बीमारियां फैलने की संभावनाएं बनी रहती हैं। औषधि विभाग की ओर से तीन दिवसीय अभियान चलाया गया लेकिन हाथ खाली ही रहे। अधिकारियों को शासन के दिशा निर्देश मिलने के बाद छापा मारकर कार्रवाई की गई थी।
जिले में ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन के उपयोग होने की संभावनाएं जताई जा रहीं थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में परचून की दुकान से लेकर मेडिकल स्टोरों पर इंजेक्शन आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इसका उपयोग गाय-भैंस का दूध उतारने के लिए किया जाता है। चिकित्सक मानते हैं कि पशुओं में इंजेक्शन लगने के बाद दूध पीने वाले लोगों में बीमारियों की संभावनाएं अथवा संक्रमण फैल सकता है। यह पशुओं के लिए कतई उपयोग करने के योग्य नहीं है, इसके बाद भी पशुपालक इंजेक्शन का उपयोग करते हैं।
इस पर रोकथाम लगाने के लिए शासन की ओर से पांच से सात मई तक तीन दिवसीय अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। औषधि विभाग की ओर से तीन संभावित जगहों पर छापा भी मारा गया, लेकिन हाथ खाली ही रहे। अब सवाल उठता है कि शहर से लेकर देहात तक कैसे पशुपालकों के हाथ में इंजेक्शन पहुंच रहे हैं।
जिला औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर पांच से सात मई तक ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन के खिलाफ अभियान चलाया गया था, संभावित तीन जगहों पर छापा भी मारा गया। इसके बावजूद भी कुछ नहीं मिला है और शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।