गांव बादामपुर में शुक्रवार शाम हल्की आंधी में ही स्कूल का पुराना जर्जर हाल भवन धराशायी हो गया। यदि यह हादसा दिन के समय में होता तो मासूमों की जान भी जा सकती थी। स्कूल भवन गिरने की सूचना ग्राम प्रधान एवं प्रधानाध्यापक ने बीएसए को दी, लेकिन शनिवार को पूरे दिन कोई भी इस भवन को देखने नहीं पहुंचा और न ही भवन गिरने की जानकारी प्रशासन को मिली।
मोहनपुरा क्षेत्र के गांव बादामपुर में यह स्कूल का भवन 14-15 साल ही पुराना है। काफी अल्प समय में ही यह भवन जर्जर हो गया। शुक्रवार शाम हल्की आंधी आई और यह भवन भरभरा कर गिर पड़ा। गनीमत यह रही कि हादसे के समय यहां कोई मौजूद नहीं था। स्कूल भवन गिरने के बाद ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। शनिवार को प्रधानाध्यापिका गांव पहुंची तो स्कूल भवन गिरने की जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी गई।
बताया गया कि जो भवन गिरा है उसमें एक कक्ष में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित था, जबकि बरामदे में कुछ छात्रों को बिठाकर अध्यापक पढ़ाते थे। चूंकि यह भवन जर्जर था, जिसके चलते एक नया स्कूल भवन भी बना लिया गया था। इस नए भवन में ही कक्षाएं संचालित होती थीं। लेकिन स्थानाभाव के चलते अध्यापक पुराने भवन के बरामदे में कुछ छात्रों को बैठाकर शिक्षा देते थे। पुराने जर्जर हाल भवन को लेकर ग्राम प्रधान सरोज कुमारी ने भी प्रशासन को दो तीन बार लिखित शिकायत की।
बीएसए गीता वर्मा ने बताया कि जो भवन गिरा हैं वह पुराना जर्जर भवन था। इस भवन में विद्यालय संचालित नहीं था, विद्यालय दूसरे भवन में संचालित था। उन्होंने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी प्रधानाध्यापिका ने दी है। लेकिन प्रभारी मंत्री का दौरा होने के कारण वहां व्यवस्तता रहीं, जिसके चलते गिरे हुए भवन का निरीक्षण नहीं हो सका।
नया भवन में भी हैं दरारें
ग्रामीण राहुल कुमार सिंह ने भवन गिरने के मामले मे बताया कि पुराने भवन में कुछ बच्चों को बरामदे में शिक्षा दी जाती है। उन्होंने बताया कि नया स्कूल भवन भी कमजोर है। नए भवन में भी स्थानों पर दीवारों में दरारें पड़ी हुई हैं, इस स्कूल का निर्माण भी करीब छह वर्ष पूर्व ही किया गया है।