एटा। जिले से भारी संख्या में रामभक्त कारसेवा के लिए अयोध्या गए थे। कुछ ऐसे भी थे, जिनके सामने ही मस्जिद विध्वंस हुआ था। ये लोग 5 दिसंबर को गए और बाबरी विध्वंस के बाद रेलगाड़ी के माध्यम से वापस लौटे थे। इस दौरान कई स्थानों पर गाड़ी पर पथराव किया गया था। मारहरा ब्लॉक के गांव नगला सुखना से घनश्याम राजपूत भी श्रीराम जन्मभूमि पर गए थे।
कारसेवक घनश्याम ने बताया कि हम सब रामलला को जल्द से जल्द टेंट से बाहर लाकर मंदिर में स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए अभियान चला, आंदोलन हुआ और जिले के बहुत से कारसेवक जेल भी गए। हम करीब 30 लोग 5 दिसंबर को मारहरा से अयोध्या के लिए रवाना हुए। अगले दिन ही सभी कार सेवकों की एक बैठक अयोध्या के कारसेवकपुरम में हुई। जिसके बाद सभी लोग जय श्रीराम के नारे लगाते हुए मस्जिद की ओर कूच कर गए।
घनश्याम आगे बताते हैं कि सभी कारसेवकों ने मस्जिद विध्वंस करना शुरू किया। तो कुछ लोग उसकी गुंबद पर चढ़ गए और कुछ नीचे से ही उसको गिराने का प्रयास करने लगे। हम लोग वहां खड़े होकर विध्वंस देख रहे थे। विध्वंस होते ही वहां बवाल मच गया, हम लोग वहां से निकलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे। मथुरा जाने वाली रेलगाड़ी तैयार खड़ी थी। उसमें सवार होकर वापस लौट लिए। जिस गाड़ी से हम लोग घर जा रहे थे, उस पर रास्ते में कई स्थानोें पर पथराव हुआ। बाद में हमको कारसेवा का प्रमाणपत्र भी मिला।