‘क्षत्रिय एक जाति नहीं, वरन समाज के लिए जीने-मरने का जज्बा है। दूसरों के
लिए जान की बाजी लगाने वाला ही सच्चा क्षत्रिय होता है। पूर्वजों का
बलिदान हमारी प्रेरणा है।’ गत विजयादशमी पर महारानी लक्ष्मीबाई बालिका इंटर
कालेज में आयोजित वार्षिक शस्त्र पूजन और क्षत्रिय सम्मेलन में अतिथि के
रूप में गजेंद्र सिंह ने ये ओजस्वी भाषण दिया था। इस पर काफी तालियां बजी
थीं।
बुधवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान फांसी लगाकर जान
देने वाले गजेंद्र सिंह एटा जिले के लोगों के चहेते रहे हैं। हर वर्ष
विजयदशमी पर होने वाले क्षत्रिय सम्मेलन में उनके भाषण को सुनने लोग आते
थे। बुधवार को उनके निधन के बाद स्थानीय लोगों में शोक की लहर है। अखिल
भारतीय क्षत्रिय महासभा ने दुख जताया। क्षत्रिय नेता गजेंद्र सिंह, सुनील
सोलंकी ने कहा कि समाज ने एक जोशीला नेता खो दिया है। वक्ताओं ने आप के
नेताओं पर गजेंद्र सिंह को उकसाने का आरोप लगाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री
अरविंद केजरीवाल के विरुद्ध अभियोग दर्ज करने की मांग की है। दुख जताने
वालों में कैलाश पुंढीर, उमेश पुंढीर, प्रभात चौहान, संजय सोलंकी, सुधीर
चौहान, यशवीर सिंह, निशांत पुंढीर, धर्मेद्र चौहान, सुधीर राघव, गुड्डू
चौहान, सुमित कुमार आदि हैं।
आकर्षक पगड़ी थी पहचान
आकर्षक पगड़ी
गजेंद्र सिंह की पहचान थी। मंच पर वह सबसे अलग दिखते थे। स्थानीय युवा
उनकी पगड़ी के प्रशंसक थे। कुछ लोगों ने तो उनसे पगड़ी बांघना सीखने की भी
पहल की थी। इस दौरान उन्होंने बताया था कि वे राजस्थान के विभिन्न
क्षेत्रों में समय-समय पर होने वाली पगड़ी प्रतियोगिताओं में कई बार
पुरस्कृत भी हुए हैं।