एटा। मलावन थाना क्षेत्र की 18 साल पुरानी अपहरण और जानलेवा हमले की घटना में चार लोगों को दोषी ठहराया गया है। इनको दस-दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट कुमार गौरव ने शुक्रवार को इस मुकदमे में दंडादेश जारी किया। जिसके तहत छह में से चार लोगों को दोषी ठहराया। दो पर आरोप सिद्ध नहीं हुए। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता यतींद्र प्रताप सिंह शाक्य ने बताया कि घटना 3 जून 2004 रात को गांव पुरसारी थाना मलावन में हुई।
जिसकी रिपोर्ट किताब सिंह ने गांव के सुरेंद्र उर्फ भूरे, सूरवीर उर्फ लंबे, सत्यप्रकाश, रमेश उर्फ पप्पू, रघुवीर सिंह और जंट सिंह पर दर्ज कराई। इन पर आरोप था कि रात करीब 11:30 बजे किताब सिंह के खेत पर पहुंचे। जहां बनी झोंपड़ी में वह अपने तीन पुत्रों के साथ सो रहा था। आरोपियों ने उनके ऊपर फायरिंग कर दी। इसमें किताब सिंह और पुत्र शेर सिंह घायल हो गए। इसके बाद आरोपी करीब 30 वर्षीय पुत्र श्योराज सिंह को जान से मारने की नीयत से अपहृत कर ले गए। बताया कि आरोपियों के साथ उनकी पुरानी रंजिश है, जिसके तहत घटना को अंजाम दिया गया है। रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी।
सात दिन बाद 10 जून को श्योराज को अलीगंज थाना क्षेत्र में एक किसान प्रमोद वर्मा की कोठरी से बरामद किया गया। जहां उसे बांधकर डाल दिया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में भेज दी। जहां सत्र परीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने सभी गवाह, साक्ष्यों को परखने के बाद सत्यप्रकाश और जंट सिंह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित किया। जबकि शेष चारों आरोपियों को अपहरण व जानलेवा हमले में दोषी ठहराया। इन्हें दस-दस साल के सश्रम कारावास सहित 30-30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है।