गर्भवती महिलाओं की जागरूकता एवं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शुरू हुआ मातृत्व सप्ताह हादसों की रोकथाम करेगा। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में बुधवार से शुरू मातृत्व सप्ताह में 20600 गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत करने का लक्ष्य है। अभियान के अंतर्गत आशा बहुएं एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर खून, सुगर, ब्लड प्रेशर आदि की जांच करेंगी।
यूनिसेफ द्वारा बीते वर्ष कराए गए सर्वे में प्रदेश में 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या पाई जाती है। यहां अत्यधिक मातृ मृत्यु दर का बड़ा कारण भी यही है। बाल्यकाल में होने वाला कुपोषण भी सीधे तौर पर मातृ स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। सीएमओ आरसी पांडेय ने बताया कि बुधवार से तीन फरवरी तक प्रस्तावित मातृत्व सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने 20600 महिलाओं का पंजीकरण कराने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि पूरे सप्ताह में सुबह नौ से शाम चार बजे तक गांव के स्वास्थ्य पोषण दिवस स्थल या आंगनबाड़ी केंद्र पर सभी गर्भवती महिलाओं की जांच कर उनका पंजीकरण किया जाएगा। किसी कारणवश छूट जाने वाली महिलाओं के लिए चार फरवरी को उपकेंद्र पर जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इनमें गंभीर प्रसूतावस्था वाली महिलाओं को पांच फरवरी को पीएचसी, सीएचसी अथवा जिला चिकित्सालय बुलाकर उनकी जांच की जाएगी।