एटा। कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 मई तक फिर से लॉकडाउन की घोषणा की है। इसके पहले दिन शहर में करीब दो सैकड़ा लोग भूखे रह गए। विधायक विपिन वर्मा डेविड द्वारा ग्रीन पार्क में संचालित रसोई 14 अप्रैल से बंद कर दी गई, जबकि रोटी बैंक एक बार ही खाना खिला रही है।
वहीं, इंद्रपुरी में भी एक टाइम खाना बन रहा है। वह भी सीमित मात्रा में बनाई जा रही है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा संचालित रसोई भगवान भरोसे है। यहां कब खाना बनता है और बंट जाता है, गरीबों को पता ही नहीं चलता। शहर में जितने भी भोजनालय संचालित हो रहे हैं। सभी में केवल शाम का खाना बनाकर बांटा जा रहा है।
कहने को तो यहां खाना सुबह से बनना शुरू हो जाता है, पर बांटा दो और तीन बजे के बाद जाता है, फलस्वरूप लोग एक ही समय अपना पेट भर पा रहे हैं। वहीं, जिला पंचायत में चल रही प्रशासन की रसोई में दोपहर 12 बजे तक भोजन बंटना शुरू नहीं हुआ।
यहां बैठे अधिकारी लोगों को कड़ी धूप में लाइन में लगवा रहे थे, जिससे परेशान होकर महिलाएं और पुरुष मंच के नीचे आकर बैठ गए। जिन लेखपालों की सूची के अनुसार खाना बांटा जा रहा है, उसके अतिरिक्त यहां अन्य दर्जनों लोग भूख से तड़पते पहुंचे पर उन्हें 12 बजे तक भोजन नहीं मिल सका।
इंद्रपुरी में बन रहे मात्र 300 पैकेट: शहर की पॉश कॉलोनी इंद्रपुरी में समाजसेवियों के सहयोग से रसोई संचालित है। इस रसोई में मात्र 300 पैकेट भोजन तैयार होता है। इस रसोई के संचालकों ने बताया कि वह 20 अप्रैल तक रसोई संचालित कर रहे हैं। उसके बाद की रणनीति अभी नहीं बनी है।
रात में घर से मंगाए चावल : जिला पंचायत की सामुदायिक रसोई में खाना बनाने वाले आधा दर्जन हलवाई के कर्मचारी मंगलवार की रात भूखे रह गए। एक कर्मचारी ने अपने घर रात नौ बजे सहयोगी को भेजकर दो किलो चावल मंगाए, तब जाकर खिचड़ी बनी और उनका पेट भर सका।
एक वक्त की रोटी भी छिन गई
नई बस्ती में रहती हूं, लगभग अस्सी साल की उम्र होने को आई, परिवार में कोई नहीं है। अब तक विधायक विपिन वर्मा द्वारा संचालित रसोई से एक वक्त की रोटी मिल रही थी। अब बुुधवार से वह भी बंद हो गई है।
प्रीतम प्यारी,नई बस्ती
नई बस्ती में रहती हूं, परिवार में कोई अन्य खाने-कमाने वाला नहीं है, अब तक मोहल्ले का ही एक समाजसेवी विधायक द्वारा चल रही रसोई से खाने का पैकेट शाम को दे जाता था। अब वह भी मना कर गया है। रसोई बंद, खाना आना भी बंद।
दालवती, नई बस्ती
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अधिकारी सुनते ही नहीं, कर्मचारी भगा देते हैं
पिछले पांच दिन से जिला पंचायत आ रहे हैं। यहां दो रोटी मांगने आते हैं, पर यहां बैठे अधिकारी सुनते नहीं और कर्मचारी धक्का देकर भगा देते हैं। ऐसे में कई दिन से बिना खाने के जी रहे हैं, अब लॉक डाउन बढ़ गया है, पता नहीं क्या होगा।
पप्पू, छितौनी रोड
अपने क्षेत्र में जाओ, लेखपाल वहीं पहुंचाएंगे खाना
चार दिन से सुबह और शाम को जिला पंचायत में खाना मांगने आते हैं, यहां यह कहकर भगा दिया जाता है कि अपने क्षेत्र में जाओ लेखपाल वहीं पहुंचाएंगे, वहां कोई खाना लेकर नहीं आता, रोज डेढ़ से दो किलोमीटर से आ रहे हैं, पर खाना नहीं मिल रहा। -सुभाष चंद्र, रेवाड़ी मोहल्ला
जितनी आवश्यकता उतना बन रहा खाना
जिला पंचायत में सामुदायिक रसोई संचालित हो रही है। जहां तक भोजन एक या दो टाइम बांटने का सवाल है, जितनी आवश्यकता है, उतना ही भोजन बनाया जा रहा है। बच रहा था, इसलिए कम बनवाया जा रहा है।
-केशव कुमार, एडीएम वित्त
रसोई दोबारा शुरू करा दी जाएगी
ग्रीन गार्डन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही रसोई संचालित की जा रही थी। 14 अप्रैल तक अनुमति थी। अब अगले 3 मई तक की अनुमति करा ली जाएगी। हलवाई भी बदला गया है, बृहस्पतिवार से यहां रसोई दोबारा शुरू करा दी जाएगी।
-विपिन वर्मा डेविड, विधायक
जिला पंचायत में बुघवार को घूंघट की आड़ में भोजन लेने पहुंची महिला।- फोटो : ETAH