कस्बा सकीट में आलू की फसल की सुरक्षा के लिए दवा का छिड़काव करता किसान। संवाद
एटा। सुबह-शाम घना कोहरा पड़ रहा है और रात के तापमान में गिरावट के साथ काफी सर्द हो रहा है। इस बदलाव ने आलू और सरसों की खेती कर रहे किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फसल की पत्तियों में सिकुड़ने और झुलसन के कारण किसान पैदावार पर प्रतिकूलता की आशंका जता रहे हैं।
आलू और सरसों की खेती करने वाले किसान राजकुमार, अमित कुमार, रामखिलाड़ी, सुरेंद्र राजपूत ने बताया कि पूरी लागत लगाने के बाद यदि मौसम विपरीत रहा तो आलू पैदावार में असर पड़ेगा। सरसों की फसल में दाने बनने का समय चल रहा है। किसानों के अनुसार पाला पड़ा तो पौधों में फूल और फलियां झड़ने लगेंगी। इससे पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा और आमदनी आधी तक रह सकती है। रात में हल्की सिंचाई कर खेत की सतह पर तापमान नियंत्रण में रखा जा रहा है ताकि पाले का असर कम हो। साथ ही किसान दवाओं का स्प्रे भी कर रहे हैं ताकि पत्तियां झुलसने से बचाई जा सकें।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने बताया कि तापमान में अभी और गिरावट संभव है। ऐसे में आलू और सरसों की फसलें जोखिम में हैं। उन्होंने किसानों को समय-समय पर दवा का छिड़काव और नमी बनाए रखने की सलाह दी है। बताया कि अगैती आलू में झुलसा रोग का खतरा है, जिसके लिए दवाओं का उपयोग करें। वहीं इन दिनों सरसों की फसलों में चेंपा और माऊ रोग का खतरा अधिक होता है। किसान माऊ रोधी दवाओं का इस्तेमाल करें।