एटा। पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। अब इसमें पुलिस भी फंस गई है। गिरफ्तार किए गए कोचिंग संचालक ने फर्जी कार्रवाई का आरोप लगाया। जिस पर अदालत ने 9 पुलिसकर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है।
कोतवाली नगर पुलिस ने भर्ती परीक्षा वाले दिन ही 17 फरवरी की सुबह करीब 8 बजे सिंधी कॉलोनी में रिंकू के मकान पर दबिश देकर वीरेश राजपूत निवासी भोपालपुर ककरावली थाना पिलुआ सहित 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार वीरेश ने पेपर आउट कराकर पास कराने के लिए पांच-पांच लाख रुपये का ठेका लिया था। दो लाख रुपये, हाईस्कूल की और इंटर की 32-32 मार्कशीट मिली थीं। 30 मूल निवास, 29 जाति प्रमाणपत्र और 23 प्रवेश पत्र भी जब्त किए गए थे।
जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद वीरेश ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कार्यालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। कहा कि उसे 17 फरवरी को सुबह 3.50 बजे उसके घर से पुलिस ने उठाया था। साथ ले जाकर मुख्य शाखा प्रगति क्लासेज कोचिंग सेंटर शाह पैलेस व शाखा पीपल अड्डा के कार्यालयों को खुलवाया। वहां से शुल्क संकलन व प्रवेश पंजिका उठाकर कोतवाली नगर पहुंचे। जहां मुझे हवालात में बंद कर पंजिकाओं के नाम पढ़कर छात्रों के घर पर दबिश दी गई। उनकी गिरफ्तारी कर शैक्षिक प्रमाण पत्र घर से ले आए। इसके बाद मुझे हवालात से निकालकर किसी एकांत जगह ले गए। धमकाकर कहा कि तूने नकल के बाबत मोटी रकम ली है, इसकी बरामदगी करा दे नहीं तो तेरा इनकाउंटर कर दिया जाएगा। इन लोगों ने लात-घूंसों से पिटाई की। जिससे वह घायल हो गया।
कस्टडी के दौरान काफी पीटा और धमकाया गया। बाद में चालान कर पुलिस जिला चिकित्सालय ले गई। जहां मैंने अपनी चोटों की बात चिकित्सक व कर्मचारियों को बताई तो उन्होंने भी धमकाया कि चोट लिखवाएगा तो और पीटा जाएगा। बाद में अदालत को प्रार्थना पत्र देकर चिकित्सकीय परीक्षण कराया, जिसमें चोट दर्ज की गई। कारागार से बाहर आने के बाद सीओ सिटी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसएसपी को भी डाक से प्रार्थना पत्र भेजा। बाद में न्यायालय की शरण ली।
पुलिस ने अदालत में वीरेश को आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति बताते हुए कहा कि उसके विरुद्ध आधा दर्जन अभियोग दर्ज हैं। पुलिस पर दबाव बनाने के लिए उसने झूठा प्रार्थना पत्र दिया है। उसके साथ कोई भी मारपीट नहीं की गई। सीजेएम कामायनी दुबे ने दोनों पक्ष के तर्क सुनने के बाद मामले को प्रथम दृष्ट्या संज्ञेय प्रवृत्ति का मानते हुए विवेचना कराया जाना न्यायोचित ठहराया है। प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए कोतवाली नगर प्रभारी को आदेशित किया है कि प्रकरण को दर्ज कर विवेचना करें और एक सप्ताह में चिक एफआईआर अदालत में प्रेषित करें।
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कार्रवाई में शामिल थे ये पुलिसकर्मी
कोतवाली नगर के एसएसआई जयवीर सिंह, एसआई अभिषेक सिंह, सत्यबिहारी सारस्वत, आरक्षी दानिश, राहुल, मनीष, जयवीर सिंह, रामअवतार, कृष्ण गोपाल शामिल थे। इन सभी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
न्यायालय ने आदेश किया है तो मामला पंजीकृत कर विवेचना की जाएगी। जो तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आख्या भेजी जाएगी। -धनंजय सिंह कुशवाहा, एएएपी