एटा। मेडिकल कॉलेज में साइटो पैथोलॉजी लैब में महिला की जांच में फाइलेरिया का दुर्लभ परजीवी मिला। इसके बाद मेडिकल कॉलेज से लेकर स्वास्थ्य विभाग में इस बीमारी को लेकर खलबली मच गई। कासगंज जनपद के गंजडुंडवारा की महिला में यह परजीवी पाया गया। उसके हाथ की गांठ की जांच में यह सामने आया था। इसका मेडिकल कॉलेज ने परीक्षण कर फाइलेरिया होने का दावा किया। बाद में स्वास्थ्य विभाग ने उस महिला का फर्रुखाबाद स्थित फाइलेरिया यूनिट में इसका परीक्षण कराया जिसमें फाइलेरिया की रिपोर्ट निगेटिव मिली।
गंजडुंडवारा की एक महिला के हाथ में दो वर्ष से गांठ थी। चार महीने से उसकी गांठ में दर्द हो रहा था। इस पर महिला ने कस्बे से ही दवा ली लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसने कासगंज भी उपचार कराया लेकिन वहां भी आराम नहीं मिला। महिला एटा के मेडिकल कॉलेज में जांच कराने आई। यहां गांठ की जांच कराने पर फाइलेरिया का परजीवी (पैरासाइट) पाया गया। साइटो पैथोलॉजी लैब की विभागाध्यक्ष डॉ. अंकिता शर्मा ने बताया कि महिला को दो साल से हाथ की कोहनी और कंधे के बीच में गांठ थी। गांठ की जांच में फाइलेरिया परजीवी पाया गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस महिला को फर्रुखाबाद के फाइलेरिया यूनिट में जांच के लिए भेजा। वहां उसका सैंपल लिया गया। सैंपल की रिपोर्ट में फाइलेरिया निगेटिव मिला। जहां उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। मलेरिया प्रभारी लोकमन सिंह ने बताया कि फर्रुखाबाद फाइलेरिया यूनिट से महिला की रिपोर्ट निगेटिव आई है। मेडिकल कॉलेज में परीक्षण के दौरान गलत रिपोर्ट पेश की गई।
क्या होता है फाइलेरिया
मेडिकल कॉलेज के साइटो पैथोलॉजी लैब की विभागाध्यक्ष डॉ. अंकिता शर्मा ने बताया कि फाइलेरिया परजीवी परजीवी सामान्यतः मच्छर के काटने से खून में पहुंचने के बाद लसीका तंत्र को फेल कर देता है और इससे टिश्यू से अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं आ पाते। इसके कारण सूजन आती है। इस बीमारी में पहले तेज बुखार, दर्द, जलन के लक्षण होते हैं। संक्रमण पुराना होने पर सूजन शुरू होती है जो स्थाई हो जाती है। इसके बाद त्वचा सख्त हो जाती है। वैसे फाइलेरिया पैरों में देखा जाता है। हाथ की त्वचा में यह परजीवी पाया जाना दुर्लभ है।