एटा। लावारिस शवों की उपेक्षा देखकर जब अमित चौहान का हृदय द्रवित हुआ तो उन्होंने उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दिलाने का संकल्प ले लिया। आज 13 वर्षों के अंदर वह 3 हजार से अधिक लावारिस शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर चुके हैं।
शहर के गली बल्देव सहाय निवासी अमित चौहान ने बताया कि इस मानवीय सफर की शुरुआत एक दृश्य देखकर हुई। पहले लावारिस शवों को पुलिस कर्मी अक्सर रिक्शे पर लादकर ले जाते थे जिससे रक्त टपकता रहता था।
श्मशान घाट पर उन्हें थोड़ी लकड़ी और टायरों के सहारे जला दिया जाता था। एक बार उन्होंने देखा कि इस तरह शव पूरी तरह से नहीं जल पाया और अस्थियां वहीं पड़ी रह गईं। यह देखकर उन्होंने 2012 में ठान लिया कि अब वह हर लावारिस शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करके उसकी अस्थियां गंगा में प्रवाहित कराएंगे।