एटा। जलवायु परिवर्तन इंसानों की वजह से हुआ है। इस परिवर्तन की चपेट में मानवों के साथ ही पशु और पक्षियों, वन, जंगल आदि आ चुके हैं। पेड़ों का कटान बड़ी वजह बना है। बचने के लिए अभी भी संभला जा सकता है। अगर समय रहते जागरुकता नहीं दिखाई तो भविष्य में स्थिति भयावह हो सकती है। जिले के रहने वाले पर्यावरणविद ज्ञानेंद्र सिंह रावत का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अब समूची दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। इसके लिए प्रकृति के प्रति मानव संसाधनों का बेहताशा उपयोग और जंगलों का अत्याधिक कटान तो जिम्मेदार है ही, इसमें भौतिक सुख-संसाधनों की मानवीय चाहत और विभिन्न क्षेत्रों के प्रदूषण के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता। बढ़ता वैश्विक तापमान और उसके चलते मौसम में आये अप्रत्याशित बदलाव का दुष्प्रभाव जीवन के हर पक्ष पर पड़ रहा है।
इससे पर्यावरण, जीवन, रहन-सहन, भोजन, पानी, और स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से प्रभाव देखा जा सकता है। जीवन का कोई भी पक्ष इसके दुष्प्रभाव से अछूता नहीं है। असलियत में जलवायु परिवर्तन से बदलता मौसम स्वास्थ्य और प्रकृति को जो नुकसान पहुंचा रहा है, उसकी भरपायी फिलहाल तो आसान नहीं दिखाई देती। यदि अब भी नहीं संभले, तो यह संकट लगातार गहराता चला जाएगा और इसका मुकाबला कर पाना बहुत मुश्किल होगा।
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पर्यावरण को दुरुस्त करने के उपाय
- पौधों को अधिक से अधिक संख्या में लगाना व रखरखाव करना
- एयर कंडीशनर का प्रयोग सीमित करना
- नदियों व तालाबों की रक्षा और सफाई
- पॉलिथीन पर पूरी तरह से पाबंदी
- पेड़ों के कटान पर प्रभावी रोक लगाना