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हर विभाग ने ताक पर रखे मानवाधिकार

Tue, 09 Dec 2014 11:25 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
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पिछड़े जनपद में ‘मानवाधिकार’ गोष्ठियों, सम्मेलनों एवं सेमिनार तक सिमट रहा है। आयोजन एवं लंबे-चौड़े भाषणों के बाद भी बहुसंख्यक लोगों में इसके प्रति जागरूकता नहीं है और लोगों का शोषण जारी है। बता दें कि बुधवार को विश्व मानवाधिकार दिवस है।
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जनपद के किसी भी विभाग में मानवाधिकारों का पालन नहीं हो रहा। काम करना तो दूर कुछ विभाग तो वांछित सूचनाएं तक नहीं दे रहे। यहां भी सर्वाधिक पीड़ित गरीब हैं। अमीर एवं पहुंच वाले अपने रौब-रुतबे एवं धनबल के सहारे मानवाधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं। वहीं शोषण से त्रस्त लोग अंतत: सुविधा शुल्क के सहारे मामले निपटा रहे हैं। मगर जागरूकता के अभाव में यह लोग मानवाधिकार के द्वार तक नहीं पहुंच रहे। दर्जनों घटनाएं इसका उदाहरण बन रही हैं।



जनसूचना अधिकार में भी अधिकारियों की मर्जी
 जनसूचना अधिकार भी अधिकारियों की मर्जी पर चल रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महीनों बाद भी पीड़ितों को न्याय एवं याची को सूचनाएं तक नहीं मिल रहीं। देश की सीमा पर तैनात सैनिक संतोष कुमार ने ऐसी ही उपेक्षा की शिकायत शासन से की है।
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इनका आरोप है कि एक वर्ष बाद भी उन्हें गांव में हुए विकास कार्यों की सूचना नहीं मिल पा रही। तहसील दिवस, मंगल दिवस में शिकायतों के बाद भी संबंधित अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे। इतना ही नहीं सुरेश चंद्रा, वरिष्ठ उपायुक्त मनरेगा ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश शासन ने जेएस राय राज्य गुणवत्ता मानीटर जेएस राय को मामले की जांच करा पंद्रह दिन में आख्या मांगी है।
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पुलिस विभाग के सर्वाधिक मामले
एटा। सर्वाधिक मामले पुलिस विभाग के हैं। एक सप्ताह पूर्व मिरहची पुलिस की मारपीट में गंभीर घायल हुआ चंचल इन दिनों नोएडा के एक निजी अस्पताल में जिंदगी मौत के बीच जूझ रहा है। परिजनों की मांग एवं आंदोलन के बाजवूद इसके आरोपी थानाध्यक्ष एवं अन्य पुलिस कर्र्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। पुलिस की बेरहम पिटाई क्या मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं है। ऐसे अनगिनत मामले लोगों की जुबां पर हैं। दर्जनों तो कोर्ट में विचाराधीन हैं।



वर्षों बाद भी नहीं सुलझे मामले

 जनपद के कई मामले वर्षों बाद भी नहीं सुलझ सके। एक माह में हुई दो बड़ी घटनाएं जिनमें पूर्व विधायक अनार सिंह दिवाकर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत एवं सराफा कारोबारी अतुल महाजन हत्याकांड आज भी पुलिस के लिए पहले बना हुआ है। यह प्रकरण भी मानवाधिकारों पर प्रशभनचिन्ह लगा रहे हैं।

हर विभाग में मामले लंबित
बीते 11 माह में विभिन्न शिकायतों के 260 मामले अपर पुलिस अधीक्षक अपराध को प्राप्त हुए हैं। इनमें सर्वाधिक मामले मारपीट एवं दुष्कर्म के हैं। पुलिस अधिकारी के अनुसार अधिकांश मामलों की सुनवाई के बाद इन्हें निस्तारित कर दिया गया है। फिलहाल 43 मामले लंबित हैं। इनमें सर्वाधिक सिटी एवं सबसे कम सकीट क्षेत्र के हैं।
सर्किल    लंबित मामले
 नगर        16
 सदर        04
 सकीट      03
 जलेसर     12
 अलीगंज    08


दुरुपयोग भी
मानवाधिकार का लाभ लेने वाले भी मानवाधिकार का दुरुपयोग करने से नहीं चूकते। विभिन्न संस्थाओं में मृतक आश्रित कोटे से लगने वाले पाल्यों पर ऐसे ही आरोप हैं। कुछ लोग तो मानवाधिकार के नाम पर ब्लैकमेलिंग भी करते हैं।


उपभोक्ता संरक्षण फोरम की भांति ही मानवाधिकार के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अर्द्ध न्यायिक प्राधिकरण का गठन होना चाहिए। ताकि प्रशासनिक-न्यायिक एवं जन प्रतिनिधियों का संयुक्त राय से पीड़ितों को न्याय मिल सके।
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- राहुल गुप्ता, एडवोकेट, मानवाधिकार कार्यकर्ता
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