बता दें कि लखनऊ आरटीए ने शुक्रवार को बैठक कर ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कर परमिट और चालक को ड्राइविंग लाइसेंस देने का फैसला लिया है। शहर में अनगिनत दौड़ रहे ई-रिक्शा चालकों की लापरवाही से शहर में अव्यवस्थाएं भी बढ़ी हैं। अधिकांश लोग लगातार बढ़ रहे जाम की वजह इन ई-रिक्शा को भी मानते हैं। लोगों के अनुसार लगातार बढ़ रही इनकी संख्या जीटी रोड पर यातायात का दबाव भी बढ़ाती है। इसके अलावा इनके द्वारा होने वाली छोटी सी सड़क दुर्घटना भी झगड़े का स्वरूप ले लेती है।
परिवहन विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद ई रिक्शा चालकों में बेचैनी दिख रही है। उनके अनुसार अब उन्हें परमिट के लिए संबंधित विभाग में शुल्क देना होगा। इसके अलावा यातायात नियमों की अनदेखी पर अब उन्हें भी चालान आदि जैसी विभागीय कार्रवाई से गुजरना होगा। उन्होंने बताया कि लाइसेंस की अनिवार्यता से उनके बच्चे अब ई-रिक्शा नहीं चला पाएंगे।
शहर में 400 से ज्यादा ई-रिक्शा
एटा। वर्तमान में 400 से ज्यादा ई-रिक्शा शहर की विभिन्न सड़कों पर दौड़ रहे हैं। 10 रुपये में चालक लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक छोड़ रहा है। इन्हीं रिक्शों में अन्य सामान भी ढोया जा रहा है। पूर्व में नगरपालिका ने इन पर अंकुश लगाने के लिए लाइसेंस जारी करने का निर्णय था, लेकिन कोई शासनादेश न होने के चलते पालिका ने हाथ खींच लिए।
लखनऊ आरटीए ने शुक्रवार को बैठक कर ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कर परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस देने का फैसला लिया है। इस संबंध में जब उन्हें शासनादेश प्राप्त होगा, तब पता लग सकेगा कि परमिट की शर्तें क्या होंगी।
- ओमप्रकाश वर्मा, एआरटीओ एटा