ठंडी सड़क स्थित पथवारी मंदिर में पूजा-अर्चना करतीं युवतियां। संवाद
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एटा। नवरात्र की अष्टमी पर बुधवार को जिमाने के लिए कन्या और लांगुर नहीं मिले। ऐसे में भक्तों ने कन्याओं को प्रसाद बांटकर रस्म अदायगी की। अधिकांश घरों में नवमी को भोजन कराने की परंपरा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति जागरूक लोग न तो अपने घर बच्चों को भोजन पर आमंत्रित कर रहे हैं और न ही अपने घरों के बच्चों को दूसरों के यहां भेज रहे हैं। वहीं, बच्चों को भोजन से ज्यादा इस दिन मिलने वाले गिफ्ट की चिंता रही।
स्थानीय निवासी पूनम ने बताया कि कोरोना वायरस जैसी महामारी के चलते इस समय कोई भी अपनी कन्या को दूसरों के घर नहीं भेज रहा है। पता नहीं किसके घर कैसा खाना बने और क्या नुकसान कर जाए। वहीं, बीना राघव ने बताया कि लॉकडाउन के बाद कन्याओं का पूजन कर लेंगे। अभी माता रानी जैसे कन्याओं का पूजन करवाएंगी वैसे कर लेंगे। घर में ही हलवा-चना बनाकर आपस में ही बांट लेंगे।